चंद्रयान-3 मिशन - लैंडिंग का काउंटडाउन...आज इतिहास रचेगा भारत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) का चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा पर सुरक्षित लैंड के लिए तैयार है। पिछली बार से सबक लेते हुए इस मिशन में कई बदलाव किए गए हैं। चंद्रयान-3 की सुरक्षित लैंडिंग पर इसरो के पूर्व वैज्ञानिक वाईएस राजन ने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत बदलाव किए गए हैं। उन्होंने चंद्रयान-3 में कई चीजें शामिल की हैं। पहले यह उतरते समय सिर्फ ऊंचाई देखता था, जिसे अल्टीमीटर कहा जाता है। इसके अलावा अब उन्होंने एक वेलोसिटी मीटर भी जोड़ा गया है, जिसे डॉप्लर कहा जाता है। इससे ऊंचाई और वेग का भी पता चल जाएगा, ताकि यह खुद को नियंत्रित कर सके।
चार साल पहले सात सितंबर, 2019 को चंद्रयान-2 मिशन चांद पर उतरने की प्रक्रिया के दौरान तब असफल हो गया था, जब उसका लैंडर 'विक्रम' ब्रेक संबंधी प्रणाली में गड़बड़ी होने के कारण चंद्रमा की सतह से टकरा गया था। उस वक्त के इसरो प्रमुख के सिवन ने 15 मिनट का आतंक बताया था। इस बार चंद्रमा पर सॉफ्ट-लैंडिंग की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को इसरो ने '17 मिनट का खौफ' करार दिया है। इसरो अधिकारियों के मुताबिक, लैंडिंग की पूरी प्रक्रिया स्वायत्त होगी, जिसके तहत लैंडर को अपने इंजन को सही समय और उचित ऊंचाई पर चालू करना होगा और उसे सही मात्रा में ईंधन का उपयोग करना होगा। इस दौरान नीचे उतरने से पहले यह पता लगाना होगा कि किसी प्रकार की बाधा या पहाड़ी क्षेत्र या गड्ढा नहीं हो। सभी मापदंडों की जांच करने और लैंडिंग का निर्णय लेने के बाद इसरो बेंगलुरु के निकट बयालालू में अपने भारतीय गहन अंतरिक्ष नेटवर्क (आईडीएसएन) से निर्धारित समय पर लैंडिंग से कुछ घंटे पहले सभी आवश्यक कमांड एलएम पर अपलोड करेगा।






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