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चक्रधर कथ्थक कल्याण केन्द्र ने पद्य्म विभूषण डॉ. तिजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित की.....

Jul 14
2 min read
  • पंडवानी की विधा को जीवित रखना ही डॉ. तिजन बाई को हमारी सच्ची श्रद्धांजली होगी....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

राजनांदगांव चक्रधर कथ्थक कल्याण केन्द्र राजनांदगांव के सभागृह में पद्य्म विभूषण डॉ. तिजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजली दी गई इस अवसर पर संस्था के संचालक व संस्थापक डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने कहा कि, डॉ. तिजन बाई का निधन लोककला के क्षेत्र में अपूर्णिय क्षति है जिसकी भरपाई होना संभव नहीं है । इस अवसर पर उन्होंने उनके साथ बिताए अनेकों अवसरों एवं कार्यक्रमों का संस्मरण भी सुनाया। अशोक चौधरी किसान नेता ने भी डॉ. तिजन बाई को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कला केन्द्र के विद्यार्थियों व कला साधकों से कहा कि कला साधना के साथ शिक्षा भी अति आवश्यक है ।


बहुत से अच्छे कलाकार शिक्षा के अभाव में कई अच्छे अवसरों से वंचित रह जाते है । संगीत विशारद् अमलेन्दु हाजरा ने कहा कि कला साधक हमेशा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होता है और कला की साधना से ही अपने जीवन को सवांरता है जो समाज में उच्च और आदर्श नैतिक मुल्यों की स्थापना करने में सहायक है उन्होंने अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि पंडवानी की विधा को जीवित रखना ही डॉ. तिजन बाई को हमारी सच्ची श्रद्धांजली होगी । इस अवसर पर राकेश इंदु भूषण ठाकुर ने डॉ. तिजन बाई को पंडवानी विधा की बहुत अच्छी कला साधक बताते हुए कहा कि वे अपने भाव भंगीमाओं से महाभारत के विभिन्न पात्रों का जीवंत अभिनय करते हुए दर्शकों का मन मोह लेती थी वे विभिन्न देशों में कला प्रदर्शन की किन्तु उस देश के भाषा से वह अनिभिग्य रही । संगीत के लिए भाषा की आवश्यकता नहीं होती है और उन्होंने अपने श्रद्धासुमन अर्पित की । डॉ. मृदुला चौरसीया ने कहा कि डॉ. तिजन बाई के पंडवानी को हम कभी नहीं भुल सकते । डॉ. आनंद वर्गीस से इस अवसर पर अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए बताया की अच्छा कलाकार अपने साधना से ही अपने आपको स्थापित करता है और उसी से उसकी पहचान समाज में होती है, डॉ. तिजन बाई पंडवानी की पर्याय बन गई । उनके निधन के पश्चात पंडवानी विधा को जीवित रखना हमारे सामने एक बड़ी चुनौति है । इस अवसर पर शैलेन्द्र तिवारी, बी.पी. वासनिक, राजनारायण जांगड़े, व चक्रधर कथ्थक कल्याण केन्द्र के छात्र-छात्राओं ने भी डॉ. तिजन बाई को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किया ।

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