छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी 2025 परीक्षा विवाद: कांग्रेस ने उठाई कॉपियां दिखाने की मांग, कहा - सिर्फ साक्षात्कार टालना समाधान नहीं...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की मुख्य परीक्षा 2025 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अभ्यर्थियों द्वारा उत्तरपुस्तिकाएं दिखाने की मांग पर मुखर होते हुए कांग्रेस ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने दो टूक कहा है कि केवल इंटरव्यू की तारीखों को आगे बढ़ाना या स्थगित करना इस समस्या का स्थायी हल नहीं है, बल्कि आयोग को अपनी साख बचाने के लिए अभ्यर्थियों को उनकी कॉपियां तत्काल उपलब्ध करानी चाहिए।
1:3 के नियम और मूल्यांकन पर उठे गंभीर सवाल -
पार्टी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2025 की मुख्य परीक्षा में 265 पदों के मुकाबले 795 अभ्यर्थियों का चयन इंटरव्यू के लिए होना चाहिए था, लेकिन आयोग ने नियम के विपरीत केवल 608 उम्मीदवारों को ही साक्षात्कार के लिए योग्य माना है। यानी तय संख्या से 187 अभ्यर्थी कम पहुंचे हैं, जो सीधे तौर पर 1:3 के नियमों के खिलाफ है। आयोग का तर्क है कि ये 187 छात्र न्यूनतम निर्धारित अंक (66 और 46) प्राप्त नहीं कर सके, जबकि छात्रों और जानकारों का मानना है कि कॉपियों के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं।
पिछली गलतियों का दिया हवाला -
कांग्रेस ने पिछले साल यानी सीजीपीएससी 2024 की परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान सामने आई उत्तरपुस्तिकाओं में गंभीर मूल्यांकन त्रुटियां उजागर हुई थीं, जहां छात्रों को जानबूझकर गलत अंक दिए गए थे। यदि इस बार भी आयोग का दावा है कि ये 187 छात्र इंटरव्यू के योग्य नहीं हैं, तो उसे अपनी पारदर्शिता साबित करने के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही छात्रों को उनकी कॉपियां दिखानी चाहिए, ताकि वे अपने अंकों का स्वमूल्यांकन कर संतुष्ट हो सकें।
आयोग इन सवालों के दे स्पष्ट जवाब -
कांग्रेस ने मांग की है कि सीजीपीएससी को निम्नलिखित बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए:
इंटरव्यू स्थगित करने के पीछे असल वजह क्या है ?
मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग को लेकर जो गंभीर सवाल उठे हैं, उनकी स्थिति क्या है ?
नई तारीखों की घोषणा कब की जाएगी ?
अभ्यर्थियों के मन में जो आशंकाएं और असंतोष है, उसका निवारण किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा ?
पार्टी का स्पष्ट मत है कि किसी भी भर्ती बोर्ड की विश्वसनीयता केवल परीक्षा आयोजित करा लेने भर से नहीं बनती, बल्कि चयन प्रक्रिया के हर एक चरण में पूरी पारदर्शिता होना अनिवार्य है।






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