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विदेशी नागरिकों की वापसी पर केंद्र का बड़ा बयान: पहले पहचान, फिर निर्वासन....

Aug 2
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि किसी विदेशी नागरिक को, जिसकी नागरिकता की पुष्टि नहीं हुई है, तब तक वापस नहीं भेजा जा सकता जब तक कि उसका देश उसकी नागरिकता की पुष्टि न करे और उसे स्वीकार करने के लिए सहमत न हो। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में कहा, "जिस विदेशी नागरिक की नागरिकता अज्ञात या अपुष्ट है, उसे उसके देश तभी वापस भेजा जा सकता है जब उसकी नागरिकता की पुष्टि हो जाए, उसके पास वैध यात्रा दस्तावेज हों और संबंधित देश उसे स्वीकार करे। नागरिकता की पुष्टि के बिना वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।"


केंद्र ने कहा कि ऐसे मामलों में, राज्य सरकार या संबंधित FRRO/FRO विदेश मंत्रालय के साथ मामला उठा सकते हैं। इसके लिए गिरफ्तारी या FIR दर्ज होने (जो भी पहले हो) के तुरंत बाद विदेशी नागरिक का विवरण और तस्वीर उपलब्ध करानी होगी, ताकि यात्रा दस्तावेज जारी करने में आसानी हो। केंद्र ने कहा कि जब तक नागरिकता की पुष्टि नहीं हो जाती और वापस भेजना संभव नहीं हो जाता, तब तक ऐसे अवैध प्रवासियों की आवाजाही पर कानूनी रूप से रोक लगाई जानी चाहिए। यह कदम भागने से रोकने, राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने और अंततः उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जरूरी है।


यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के 21 मार्च, 2025 के उस आदेश के जवाब में दाखिल किया गया है, जिसमें असम में विदेशी घोषित किए गए लोगों को बिना वापस भेजे जाने की संभावना के अनिश्चित काल तक हिरासत में रखने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हो रही थी। केंद्र ने कहा कि सजा या अदालती कार्यवाही पूरी होने के बाद संबंधित राज्य, केंद्र शासित प्रदेश या 'फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस' (FRRO) द्वारा विदेशी नागरिक को वापस भेजा जा सकता है, बशर्ते उस व्यक्ति के पास वैध यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट हो और उसके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित न हो। मंत्रालय ने कहा, "वापस भेजने से पहले नागरिकता की पुष्टि की प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित देश के दूतावास या उच्चायोग से आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्राप्त करना जरूरी है।

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