छत्तीसगढ़ में मवेशियों के संरक्षण को मिलेगा नया आयाम: राज्य में 40 नए गौधामों के निर्माण को मिली हरी झंडी...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर: राज्य में मवेशियों की सुरक्षा, बेहतर देखभाल और संवर्धन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पशुधन विकास विभाग ने 'गौधाम योजना' के तहत प्रदेशभर में 40 नए गौधामों की स्थापना का रास्ता साफ कर दिया है। शासन की इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेसहारा और जरूरतमंद गौवंश को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना और उनकी नियमित देखभाल के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
किन जिलों में बनेंगे नए केंद्र ?
विभाग द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, सरगुजा जिले के विश्वनाथ गोविंद ग्राम पंचायत (अंबिकापुर) के अलावा बिलासपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, नारायणपुर और जशपुर समेत कई प्रमुख जिलों में ये नए गौधाम विकसित किए जाएंगे। इन सभी केंद्रों पर मवेशियों के रख-रखाव के लिए आधुनिक और व्यवस्थित प्रबंध किए जाएंगे।
बुनियादी सुविधाओं पर रहेगा विशेष जोर -
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले सभी जरूरी अधोसंरचनात्मक काम प्राथमिकता के आधार पर पूरे किए जाएं। इनमें मुख्य रूप से: -
मवेशियों के लिए विशाल और हवादार शेड
पीने के लिए साफ पानी की निरंतर व्यवस्था
परिसर में निर्बाध बिजली आपूर्ति
सुरक्षा के लिए मजबूत फेंसिंग और बाउंड्री वॉल
इन सभी सुविधाओं को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को सौंपी गई है। आयोग यह भी निगरानी करेगा कि योजना का पूरा खर्च निर्धारित वित्तीय नियमों और प्रावधानों के दायरे में ही किया जाए।
मंडी बोर्ड के सहयोग से होगा वित्तीय प्रबंधन -
इन गौधामों के निर्माण और संचालन पर होने वाला पूरा खर्च राज्य कृषि विपणन मंडी बोर्ड, रायपुर से मिलने वाली राशि से उठाया जाएगा। विभाग ने वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तय दिशानिर्देशों के तहत ही कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
पूरी तैयारी के बाद ही होगा मवेशियों का विस्थापन -
प्रशासन की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि किसी भी गौधाम में मवेशियों को शिफ्ट करने से पहले वहां सभी मूलभूत तैयारियां शत-प्रतिशत पूरी होनी चाहिए। इसका उद्देश्य यह है कि मवेशियों को नई जगह पर पहुंचने के बाद उनके खान-पान, रहन-सहन और सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
जानकारों का मानना है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में घूम रहे बेसहारा मवेशियों की समस्या से निपटने में यह योजना काफी मददगार साबित होगी। इन केंद्रों के शुरू होने से मवेशियों को बेहतर माहौल मिलने के साथ-साथ उनके व्यवस्थित प्रबंधन का मार्ग भी प्रशस्त होगा।






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