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नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता से कथित मारपीट का मामला....

Sep 5
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट से जुड़ा है। पुलिस ने शुक्रवार को भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया था, जिसके बाद शनिवार को उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया। जानकारी के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज को शनिवार दोपहर करीब दो बजे एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालर के आवास पर पेश किया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट सूत्रों ने बताया कि भारद्वाज की ओर से उनके वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जज के सामने पेश हुए। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।


यह मामला जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता के साथ मारपीट की गई थी। इस घटना को लेकर मामला दर्ज किया गया और जांच के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सामने आया। दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज के खिलाफ दर्ज एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित धाराएं भी शामिल की हैं। इसके अलावा उन पर आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। भारद्वाज के खिलाफ बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले POCSO अधिनियम के तहत भी एक अलग मामला दर्ज होने की बात सामने आई है। फिलहाल ये सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। किसी भी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही होगा।


स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हिरासत में लिया गया था। उनकी हिरासत से कुछ घंटे पहले ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े लोगों ने दिल्ली के पार्लियामेंट रोड स्थित पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इसके बाद भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। अब अदालत से एक दिन की पुलिस कस्टडी मिलने के बाद जांच एजेंसी उनसे मामले से जुड़े घटनाक्रम को लेकर पूछताछ कर सकती है। पुलिस हिरासत की अवधि के दौरान जांच अधिकारी उन तथ्यों की पड़ताल कर सकते हैं, जिन्हें मामले की जांच के लिए आवश्यक माना जा रहा है। मामला जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील और प्रमुख प्रदर्शन स्थल से जुड़ा होने के कारण चर्चा में है। यहां विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा नियमित तौर पर प्रदर्शन किए जाते हैं। जुलाई में हुए संबंधित विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले ने बाद में कानूनी रूप ले लिया और पुलिस ने शिकायत तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच शुरू की।


मामले में एक नाबालिग एक्टिविस्ट का संदर्भ आने और POCSO एक्ट के तहत अलग मामला दर्ज होने के कारण कानूनी प्रक्रिया और अधिक संवेदनशील हो जाती है। नाबालिग से संबंधित मामलों में उसकी पहचान और ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक करने से बचना आवश्यक होता है, जिनसे उसकी पहचान उजागर हो सकती है। दूसरी तरफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल होने के कारण भी मामले को गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसी को अब शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े साक्ष्य जुटाने और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का काम करना होगा। कथित घटना के समय मौजूद लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। एक दिन की पुलिस कस्टडी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस हिरासत जांच की प्रक्रिया का हिस्सा होती है। अदालत के सामने आगे होने वाली सुनवाई और जांच एजेंसी की ओर से पेश किए जाने वाले तथ्यों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी। स्वतंत्र भारद्वाज की हिरासत से पहले पुलिस स्टेशन के बाहर हुए प्रदर्शन के कारण मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में आया।


प्रदर्शन में उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई थी। इसके कुछ घंटे बाद ही बुलंदशहर में उन्हें हिरासत में लिया गया और फिर दिल्ली लाकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अब पुलिस की जांच का फोकस जुलाई की कथित घटना से जुड़े पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने पर रहेगा। यह भी देखा जाएगा कि दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं। अलग से दर्ज POCSO मामले की जांच भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी। भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हुई हैं। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने पर उन्हें दोबारा संबंधित अदालत के सामने पेश किए जाने की प्रक्रिया होगी, जहां आगे की हिरासत या अन्य कानूनी पहलुओं पर फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और मामला जांच तथा अदालत के विचाराधीन है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही पूरे मामले से जुड़े तथ्य अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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