CNG और इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत, 15 से 20 साल तक बढ़ सकती है उपयोग सीमा...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और CNG वाहनों की उपयोग सीमा 15 साल से बढ़ाकर 20 साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। फिलहाल इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय 15 साल का रोड टैक्स जमा किया जाता है। इसके अलावा, नेशनल परमिट सिस्टम को पूरी तरह ऑनलाइन करने और ऑटोमोबाइल कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स को ट्रेड सर्टिफिकेट स्ट्रक्चर में शामिल करने का भी प्रस्ताव है। हालांकि, ये बदलाव फिलहाल प्रस्तावित हैं और अंतिम नियम अधिसूचना के बाद ही लागू होंगे ।
वाहन आयु सीमा में बढ़ोतरी - मौजूदा नियमों के तहत इन वाहनों की राष्ट्रीय परमिट आयु सीमा 12 और 15 साल है। ड्राफ्ट के मुताबिक, बैटरी, हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस (CNG) आधारित वाहनों के लिए इसे बढ़ाकर क्रमशः 17 और 20 साल किया जा सकता है।
राष्ट्रीय परमिट सिस्टम ऑनलाइन - नेशनल परमिट सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और ऑनलाइन करने का प्रस्ताव है। अब वाहन मालिकों को हर साल परमिट रिन्यू कराने के बजाय अधिकतम पांच साल की ऑथराइज़ेशन लेने का विकल्प मिल सकता है।
फीस संरचना - पांच साल की ऑथराइज़ेशन की कुल फीस 82,500 रुपये होगी (16,500 रुपये प्रति वर्ष की दर से)।
VAHAN डेटाबेस का उपयोग - फॉर्म 16, 46 और 48 में पहले से उपलब्ध जानकारी को ऑटो-फिल करने के लिए VAHAN डेटाबेस का अधिक उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।
यह राहत किन वाहनों को मिलेगी ?
यह प्रस्तावित छूट सभी वाहनों पर लागू नहीं होगी, बल्कि विशेष रूप से उन कमर्शियल वाहनों के लिए है जो बैटरी, हाइड्रोजन या CNG से चलते हैं। सरकार का उद्देश्य स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहित करना है।
अभी प्रस्तावित ही है, ये सभी बदलाव फिलहाल ड्राफ्ट स्टेज में हैं। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही ये नियम लागू होंगे। जनता से राय मांगी गई, सरकार ने इन प्रस्तावों पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। नागरिक 30 दिनों के भीतर अपने विचार MoRTH को भेज सकते हैं।
अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो CNG और इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को लंबी अवधि तक अपने वाहनों का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी, साथ ही राष्ट्रीय परमिट प्रक्रिया भी सरल और डिजिटल हो जाएगी। यह कदम न केवल वाहन मालिकों के लिए राहत भरा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






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