बस्तर की पारंपरिक ढोकरा शिल्प कला को मिलेगी वैश्विक और राष्ट्रीय पहचान...
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की उच्चस्तरीय टीम ने जगदलपुर के चिलकुटी गांव का किया दौरा, जल्द बनेगा 'मॉडल प्रीमियम क्लस्टर'...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
रायपुर, छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और अनूठी पारंपरिक ढोकरा (बेलमेटल) शिल्प कला को अब राष्ट्रीय स्तर पर एक नई और बड़ी पहचान मिलने जा रही है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा देश भर के चुनिंदा ट्राइबल आर्टिजन क्लस्टरों को प्रीमियम क्लस्टर के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है, जिसके तहत बस्तर के ढोकरा क्लस्टर का चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
इसी सिलसिले में जिला प्रशासन के समन्वय और कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में, मंत्रालय के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम चिलकुटी का मैदानी दौरा किया। इस केंद्रीय दल की अगुवाई मंत्रालय के अवर सचिव डॉ. सुधीर कुमार कर रहे थे। टीम में उनके साथ प्रोजेक्ट एसोसिएट व सलाहकार नौरिन शाहिद और क्लस्टर डेवलपमेंट एक्सपर्ट जागेश्वर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बारीकियों से समझी शिल्प निर्माण की प्रक्रिया -
आदिवासी विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दौरे के दौरान केंद्रीय अधिकारियों ने स्थानीय आदिवासी शिल्पकार परिवारों से सीधी और विस्तृत बातचीत की। दल ने ढोकरा शिल्प तैयार करने की बेहद जटिल और पारंपरिक तकनीकों का बारीकी से निरीक्षण किया—जिसमें मोम से बारीक सांचे तैयार करना, मिट्टी का लेप चढ़ाना और उसके बाद धातु की ढलाई करने की प्रक्रिया शामिल है। इसके अलावा, टीम ने वन विभाग द्वारा कारीगरों की सुविधा के लिए बनाए गए सामुदायिक भवन में चल रही गतिविधियों का भी सूक्ष्म अवलोकन किया।
एक वर्ष के भीतर तैयार होगी एकीकृत कार्ययोजना -
मंत्रालय की दूरदर्शी योजना चिलकुटी गांव को एक समग्र 'मॉडल प्रीमियम क्लस्टर' के रूप में स्थापित करने की है। इसके तहत एक वर्ष की विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी, जिसके अंतर्गत एक ही एकीकृत परिसर में अत्याधुनिक ढोकरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, मटेरियल स्टोर और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ आधुनिक बाजार की माँग के अनुरूप उनकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग भी की जाएगी।
इस पूरी परियोजना के तहत 'बस्तर कला गुढ़ी एक्सपीरियंस जोन' को एक सशक्त मार्केटिंग हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, ताकि यहाँ के पारंपरिक शिल्पकारों को सीधे देश के बड़े और राष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर उनकी आजीविका को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
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