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बाराबंकी: प्रधानमंत्री की पहल से हथकरघा उद्योग को मिली नई उड़ान.....

Aug 19
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

बाराबंकी हैंडलूम दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से की गई अपील का असर अब देश के बुनकरों और हथकरघा कारोबारियों के बीच साफ दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सात अगस्त को देशवासियों से भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को बढ़ावा देने और स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को अपनाने की अपील की थी। इसके बाद कई क्षेत्रों में हथकरघा उत्पादों की मांग बढ़ी है। खासतौर पर ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) के तहत तैयार किए जा रहे बुनकरों के स्टोल, गमछे और अन्य कपड़ों को लोगों का बेहतर प्रतिसाद मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने हैंडलूम दिवस पर सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने देशवासियों से बुनकरों के हाथों से तैयार किए गए विभिन्न प्रकार के वस्त्रों को खरीदने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से कहा था कि वे भारत की पारंपरिक कला और हथकरघा उद्योग को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। प्रधानमंत्री की इस पहल के बाद हथकरघा उत्पादों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है।


प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लोगों से अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पादों और ‘गेट रेडी विद मी’ (GRWM) जैसे वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने का आग्रह किया था। इसके लिए #NationalHandloomDay का इस्तेमाल करने की अपील भी की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य देश की पुरानी हथकरघा परंपरा को नई पहचान दिलाना और बुनकरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। जिले के बुनकरों के लिए प्रधानमंत्री की यह पहल काफी लाभदायक साबित हो रही है। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के तहत तैयार किए जा रहे स्टोल, गमछा और अन्य कपड़ों की मांग में तेजी आई है। पहले जहां इन उत्पादों को सीमित बाजार मिलता था, वहीं अब सोशल मीडिया और सरकारी स्तर पर प्रचार मिलने से इन्हें देशभर में पहचान मिल रही है। बुनकरों का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील से उनके काम को नई पहचान मिली है। हथकरघा उत्पाद केवल कपड़े नहीं होते, बल्कि इनमें वर्षों पुरानी कला, परंपरा और मेहनत जुड़ी होती है। बुनकर अपने हाथों से इन वस्त्रों को तैयार करते हैं, जिसमें काफी समय और कौशल लगता है। अब जब लोगों का ध्यान इन उत्पादों की ओर बढ़ रहा है तो बुनकरों को बेहतर आय की उम्मीद जगी है। हथकरघा उद्योग भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बुनकर अपनी पारंपरिक तकनीकों से अलग-अलग तरह के कपड़े तैयार करते हैं। इन उत्पादों में स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान की झलक देखने को मिलती है।


सरकार भी लगातार हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना के तहत जिले की विशेष पहचान वाले उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जाता है। बुनकरों को प्रशिक्षण, बाजार उपलब्ध कराने और उत्पादों की ब्रांडिंग में भी सहायता दी जा रही है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों में स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पादों को लेकर रुचि बढ़ी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए छोटे कारीगरों और बुनकरों को अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिल रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हैंडलूम दिवस का उद्देश्य केवल हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि उन लाखों बुनकर परिवारों का सम्मान करना भी है, जो अपनी मेहनत से इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की अपील ने इन कारीगरों को नई ऊर्जा दी है और उनके उत्पादों को व्यापक स्तर पर पहचान मिलने का रास्ता खोला है। आने वाले समय में हथकरघा क्षेत्र में और तेजी आने की संभावना है। यदि लोग लगातार स्थानीय और हस्तनिर्मित उत्पादों को अपनाते हैं तो इससे बुनकरों की आय बढ़ेगी और भारत की पारंपरिक कला को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी।

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