अध्यात्म और सेवा का अनूठा संगम: रायपुर में आज से गीता ज्ञान अमृत वर्षा, 30 को होगा भव्य हवन...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर की पावन भूमि पर कार्तिक मास के पवित्र अवसर पर तीन दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ हो रहा है। अश्विनी नगर स्थित सोनकर मैरिज पैलेस में आज 27 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।
जीवन दर्शन और कर्मयोग की शिक्षा -
प्रयागराज से पधार रहे प्रबुद्ध संत संकर्षण शरण के सान्निध्य में यह आयोजन संपन्न हो रहा है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत गीता के शाश्वत संदेशों, आध्यात्मिक चिंतन और जीवनोपयोगी शिक्षाओं से परिचित कराया जाएगा। भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए कर्म, धर्म, भक्ति और कर्तव्य के उपदेशों को बेहद सरल रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि लोग इन्हें अपने दैनिक जीवन में उतार सकें। अनुष्ठान के ठीक एक दिन बाद, यानी 30 अक्टूबर को सुबह 7 बजे एक भव्य हवन का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ इस आध्यात्मिक महोत्सव का समापन होगा।

साधना से जनसेवा तक का सफर -
संत संकर्षण शरण केवल धर्म और पुराणों के मर्मज्ञ ही नहीं हैं, बल्कि वे मां कामाख्या के अनन्य उपासक और दस महाविद्याओं के साधक भी हैं। बिहार के सासाराम के पास स्थित बेरुकही गांव में जन्मे और प्रयागराज में शिक्षा प्राप्त करने वाले संकर्षण शरण का जीवन विद्यार्थी काल से ही साधना और अध्यात्म को समर्पित रहा है। कठिन परिस्थितियों और कठोर तपस्या के बाद उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को विस्तार दिया। वर्तमान में वे प्रयागराज के नैनी से अपने अनुयायियों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। गृहस्थ जीवन का निर्वहन करते हुए वैराग्य और सेवा का मार्ग अपनाने वाले वे एक आदर्श संत के रूप में जाने जाते हैं।
समाज सेवा और जन कल्याण के कार्य -
संत संकर्षण शरण के मार्गदर्शन में मां कामाख्या जन कल्याण सेवा संस्थान तथा मां कामाख्या धर्मादा ट्रस्ट के माध्यम से देश के कई राज्यों—जैसे उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली—में व्यापक स्तर पर सामाजिक और धार्मिक गतिविधियां चलाई जाती हैं।
संस्था द्वारा लगातार कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं:
जरूरतमंद बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था।
गरीब कन्याओं के विवाह में आर्थिक सहयोग।
असहाय परिवारों को भोजन, वस्त्र और आवश्यक सामग्री का वितरण।
स्वास्थ्य सेवाओं के प्रसार के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर।
पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान।
धार्मिक चेतना के प्रसार के लिए सुंदरकांड पाठ, भजन और प्रसाद वितरण।
यह तीन दिवसीय आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, सेवा भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस आध्यात्मिक धारा का लाभ उठाने की अपील की है।






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