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दीक्षांत समारोह में व्यवस्थाएं चरमराईं, छात्रों के विरोध के बीच अधिकारियों को संभालनी पड़ी स्थिति...

Aug 8
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

पटना :- पटना विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह शनिवार को पटना वीमेंस कॉलेज के मदर वेरोनिका ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। समारोह के दौरान उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब डिग्री लेने पहुंचे छात्रों ने उन्हें मंच पर बुलाकर डिग्री प्रदान किए जाने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों के विरोध और हंगामे के बीच राज्यपाल को अपना संबोधन किए बिना ही कार्यक्रम से लौटना पड़ा। दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर माना जाता है। इस मौके पर विद्यार्थियों को उनकी डिग्री और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाता है। लेकिन शनिवार को आयोजित समारोह में छात्रों के विरोध के कारण कार्यक्रम का माहौल अचानक बदल गया और प्रशासन को व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।


मंच पर डिग्री देने की मांग को लेकर विरोध कार्यक्रम के दौरान छात्रों की प्रमुख मांग थी कि उन्हें भी अन्य सम्मानित विद्यार्थियों की तरह मंच पर बुलाकर डिग्री प्रदान की जाए। छात्रों का कहना था कि दीक्षांत समारोह उनके शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है और उन्हें मंच से डिग्री प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। जब छात्रों की मांग के अनुरूप व्यवस्था नहीं हुई तो उन्होंने समारोह के दौरान विरोध और हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति को देखते हुए कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और आयोजकों को हस्तक्षेप करना पड़ा।


हंगामे के कारण समारोह का निर्धारित कार्यक्रम प्रभावित हुआ। मंच पर डिग्री वितरण की प्रक्रिया को सीमित कर दिया गया और केवल गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले तथा पीएचडी डिग्री धारकों को ही मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल बिना संबोधन लौटे समारोह में राज्यपाल की मौजूदगी के कारण कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया था। राज्यपाल को समारोह को संबोधित करना था, लेकिन छात्रों के हंगामे के चलते वह अपना संबोधन नहीं कर सके।


स्थिति सामान्य नहीं होने पर राज्यपाल कार्यक्रम के बीच से ही वापस चले गए। उनके बिना संबोधन किए लौटने से समारोह की औपचारिकता भी प्रभावित हुई। राज्यपाल के जाने के बाद भी छात्रों की मांग और समारोह में हुई अव्यवस्था चर्चा का विषय बनी रही। विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कार्यक्रम को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा कराने और छात्रों की नाराजगी को नियंत्रित करने की चुनौती बनी रही। 38 टॉपर्स को मिला गोल्ड मेडल दीक्षांत समारोह में पीजी सत्र 2023-25 के 38 टॉपर्स को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इन विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। गोल्ड मेडल पाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर खास रहा। उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया और उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई।


इसके अलावा पीएचडी डिग्री धारकों को भी मंच पर डिग्री प्रदान की गई। हालांकि, सामान्य डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों को मंच पर बुलाने की मांग पूरी नहीं हो सकी। विद्यार्थियों के लिए दीक्षांत समारोह का महत्व दीक्षांत समारोह किसी भी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है। वर्षों की पढ़ाई और मेहनत के बाद विद्यार्थियों को इसी अवसर पर औपचारिक रूप से डिग्री प्रदान की जाती है। ऐसे में छात्रों की इच्छा होती है कि उन्हें मंच पर बुलाकर डिग्री दी जाए और उनके शैक्षणिक सफर को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिले। पटना विश्वविद्यालय के समारोह में भी छात्रों ने इसी मांग को लेकर विरोध किया। छात्रों के विरोध के कारण कार्यक्रम की सामान्य प्रक्रिया बाधित हुई। हालांकि, विश्वविद्यालय ने गोल्ड मेडलिस्ट और पीएचडी डिग्री धारकों के सम्मान की प्रक्रिया पूरी की।


समारोह की व्यवस्था पर उठे सवाल हंगामे के बाद समारोह के आयोजन और डिग्री वितरण की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे। छात्रों को मंच पर बुलाकर डिग्री देने की व्यवस्था को लेकर पहले से स्पष्टता नहीं होने की स्थिति में नाराजगी बढ़ी। दीक्षांत समारोह जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और उनके परिजनों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में आयोजन की व्यवस्था, विद्यार्थियों की अपेक्षाओं और कार्यक्रम की प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय जरूरी माना जाता है। शनिवार की घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को लेकर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की जरूरत को रेखांकित किया है। विश्वविद्यालय के लिए चुनौती पटना विश्वविद्यालय बिहार के प्रमुख और पुराने विश्वविद्यालयों में शामिल है। ऐसे में उसके दीक्षांत समारोह को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों की अपेक्षाएं भी अधिक रहती हैं।


समारोह में हुआ हंगामा विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला रहा। राज्यपाल का बिना संबोधन किए कार्यक्रम से लौटना भी इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू रहा। हालांकि, गोल्ड मेडल और पीएचडी डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान किया गया। आगे संवाद की जरूरत छात्रों की मांग को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अब विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करने की आवश्यकता होगी। यदि डिग्री वितरण को लेकर छात्रों की अपेक्षाओं और विश्वविद्यालय की प्रक्रिया के बीच कोई अंतर है, तो उसे स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए जीवनभर याद रहने वाला अवसर होता है।


ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच बेहतर संवाद के जरिए भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता है। शनिवार को आयोजित पटना विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में जहां 38 पीजी टॉपर्स को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया और पीएचडी धारकों को डिग्री प्रदान की गई, वहीं छात्रों के विरोध ने कार्यक्रम की सुचारु व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। हंगामे के कारण राज्यपाल को अपना संबोधन किए बिना ही समारोह से लौटना पड़ा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांग पर आगे क्या कदम उठाता है।

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