अमित शाह पहुंचे विक्रमजीत के घर...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच पंजाब में मादक पदार्थों का अवैध कारोबार एक बार फिर सूबे की सियासत के केंद्र में आ गया है। इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को पंजाब दौरे पर पहुंचे। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने गुरदासपुर के माड़ी पन्नवां गांव पहुंचकर विक्रमजीत सिंह के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। गौरतलब है कि बीते 15 अक्टूबर को कथित तौर पर ड्रग्स के धंधे का विरोध करने की वजह से विक्रमजीत की जान ले ली गई थी।
गृह मंत्री का यह दौरा ऐसे संवेदनशील वक्त पर हुआ है जब राज्य में गैरकानूनी नशीले पदार्थों की बिक्री और इसके खिलाफ मुखर होने वाले नागरिकों की हिफाजत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार ने भी राज्य प्रशासन से कई बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। अपनी इस यात्रा के दौरान शाह ने उन परिवारों से मिलने की रूपरेखा तैयार की है जो इस अवैध कारोबार की चपेट में आए लोगों के कारण प्रभावित हुए हैं।
प्रारंभिक सूचनाओं के मुताबिक, विक्रमजीत पर यह हमला 15 अक्टूबर को हुआ था। शुरुआती तौर पर आरोप है कि प्रतिबंधित पदार्थों की खरीद-फरोख्त का विरोध करने के चलते उन्हें निशाना बनाया गया, हालांकि स्थानीय पुलिस ने इस वारदात का ड्रग्स सिंडिकेट से सीधा ताल्लुक होने से इंकार किया है। ऐसे में घटना के असल कारणों और दावों की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी। किसी भी आपराधिक प्रकरण में शुरुआती आरोपों और कानूनी रूप से साबित तथ्यों में फर्क होता है, इसलिए इस मामले की गहराई से पड़ताल और दोषियों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।
पंजाब के राजनीतिक गलियारों में ड्रग्स का यह नासूर लंबे वक्त से बहस का बड़ा मुद्दा रहा है। नौजवानों के बर्बाद होते भविष्य और अवैध व्यापार पर लगाम कसने के दावों को लेकर सियासत गरमाती रही है। अपने पंजाब प्रवास से पहले गृह मंत्री ने स्पष्ट किया था कि वह उन परिवारों से जरूर मिलेंगे जिनके अपनों ने कथित तौर पर चिट्टा तस्करों के खिलाफ आवाज बुलंद की और अपनी जिंदगी गंवा दी।
स्थानीय स्तर पर हेरोइन जैसे नशीले द्रव्यों को 'चिट्टा' कहकर पुकारा जाता है। इन अवैध धंधों पर शिकंजा कसने के लिए केवल पुलिसिया कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, ग्रासरूट लेवल पर निगरानी और पीड़ित युवाओं के लिए पुनर्वास केंद्रों का संचालन जैसे कदम भी उठाने होंगे।
अन्य पीड़ित परिवारों से भी मिलेंगे गृह मंत्री -
अमित शाह का यह दौरा सिर्फ गुरदासपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक उन्हें संगरूर के तूर बंजारा गांव में गुलजार सिंह के घर और मानसा में नशा विरोधी मुहिम से जुड़े परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से भी भेंट करनी है। इसके बाद उनका लुधियाना में दशहरा उत्सव में भाग लेने का कार्यक्रम है।
बता दें कि परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उनके समर्थकों ने न्याय के लिए जोरदार प्रदर्शन किए थे। वहीं, संगरूर के गुलजार सिंह की संदिग्ध मौत का मामला भी इलाके में अवैध पदार्थों की बिक्री के विरोध से जुड़ा हुआ है। इन तमाम घटनाओं ने सिस्टम के कामकाज, शिकायतों पर बरती जाने वाली सुस्ती और गवाहों या शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
चुनावी सरगर्मी और सियासी बयानबाजी -
पंजाब में अगले वर्ष होने वाले चुनावों के मद्देनजर यह मसला तमाम राजनीतिक दलों के एजेंडे में सबसे ऊपर आ गया है। भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है, जबकि सत्ताधारी दल और अन्य विपक्षी खेमे के बीच इस पर जमकर छींटाकशी जारी है। केवल नेताओं के दौरों या बयानों से इस विकराल समस्या का अंत नहीं होने वाला, इसके लिए जमीन पर तस्करों के नेटवर्क को तोड़ना, स्थानीय शिकायतों पर पारदर्शी जांच करना और पीड़ितों के इलाज की पुख्ता व्यवस्था करना अनिवार्य है।
पीड़ित परिवार से केंद्रीय मंत्री की इस मुलाकात ने इस त्रासदी को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों को कितनी जल्दी कानून के कठघरे में लाया जाता है। पंजाब को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को आपसी मतभेद भुलाकर सीमा पार से होने वाली तस्करी और स्थानीय पैठ पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त रूप से गंभीर प्रयास करने होंगे।
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