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कृषि विभाग का बड़ा अभियान: नकली बीज और खाद पर कड़ी कार्रवाई.....

Jul 31
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा और कृषि व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए खाद की कालाबाजारी करने वालों पर शिकंजा कस दिया है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने शुक्रवार को रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि विभाग की उपलब्धियों और विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि पूरे प्रदेश में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। इसके तहत अब तक 472 स्थानों पर कार्रवाई की गई, जिसमें 68 हजार बोरी उर्वरक (फर्टिलाइजर) जब्त किए गए। साथ ही 11 दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं और 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यापारी या संस्था किसानों को गलत, अमानक या नकली बीज एवं खाद उपलब्ध कराती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सही हाइब्रिड बीजों की जगह अमानक बीजों का वितरण या खाद की कालाबाजारी करने वालों को किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ा जाएगा।


बस्तर के विकास पर सरकार का विशेष फोकस

रामविचार नेताम ने कहा कि आज बस्तर शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अब वहां बड़े पैमाने पर विकास कार्यों की आवश्यकता है। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग मिलकर स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने बताया कि सभी विभागों के संचालकों और अधिकारियों ने बस्तर का दौरा कर वहां किसानों और हितग्राहियों से चर्चा की है। सरकार अब ऐसी योजना तैयार कर रही है जिसमें एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों द्वारा किसानों और ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उनकी आय बढ़ाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।


गर्मियों में धान की जगह दलहन, तिलहन और सब्जियों पर जोर कृषि मंत्री ने कहा कि धान और केले जैसी फसलों में सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है, जबकि प्रदेश के कई हिस्सों में जल उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसे देखते हुए विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है कि वे गर्मी के मौसम में धान के बजाय दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती करें। इससे पानी की बचत होगी और किसानों को बेहतर आय भी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि जैविक खेती, फूलों की खेती और वैकल्पिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है।


जैविक खेती और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान

नेताम ने बताया कि सरकार रासायनिक खाद पर निर्भरता कम कर जैविक खाद और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। विभाग कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर खेती के विकल्प विकसित करने पर काम कर रहा है। जल संरक्षण को लेकर भी योजनाएं बनाई जा रही हैं और कोरबा के बांगो डैम को जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए चिन्हित किया गया है।


प्रदेश में औसत से अधिक वर्षा, 83 प्रतिशत बोनी पूरी

कृषि विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी ने विभागीय कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में लगभग 40 लाख कृषक परिवार हैं, जिनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत किसान शामिल हैं। 30 जुलाई 2026 तकप्रदेश में 543.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले दस वर्षों के औसत से अधिक है। खरीफ 2026 के लिए 48.69 लाख हेक्टेयर में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक 83 प्रतिशत बोनी पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि किसानों को उर्वरकों की कोई कमी न हो, इसके लिए 98 प्रतिशत रासायनिक उर्वरकों का भंडारण सुनिश्चित किया गया है। उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए 5,466 निरीक्षण किए गए, जिनमें कई मामलों में एफआईआर, लाइसेंस निरस्तीकरण और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।


किसानों को योजनाओं का मिल रहा लाभ

सचिव ने बताया कि कृषक उन्नति योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। खरीफ 2023 से 2025 के बीच 25.52 लाख किसानों को 35,892.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। PM-AASHA योजना के तहत पहली बार दलहन और तिलहन की एमएसपी पर खरीदी की गई, जिसके लिए किसानों को 215.47 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने बताया कि NMEO-OS योजना के तहत तिलहन क्षेत्र का विस्तार किया गया है, जिससे 36 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए। वहीं आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत 11,218 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रदर्शन कराया गया और प्रमाणित बीज वितरित किए गए। NFSNM योजना के तहत 54,525 किसानों को लाभ मिला तथा 81,910 क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए गए।


सिंचाई, बीमा और डिजिटल कृषि को बढ़ावा

सिद्धार्थ कोमल परदेसी ने बताया कि PMKSY के तहत 49,983 किसानों को लाभ मिला और 41,957 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया गया। इसके लिए 147 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के तहत 24.63 लाख किसानों को 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि जारी की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ और रबी 2025-26 में 17.97 लाख किसानों ने बीमा कराया, जबकि किसानों को 277.05 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया। इसके अलावा एग्रीस्टैक और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 19,389 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी हो चुकी है और 36 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया जा चुका है। सरकार डिजिटल फसल सर्वे और भू-अभिलेख आधारित सेवाओं के एकीकरण पर भी तेजी से काम कर रही है |

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