बस्तर आने वाले सैलानियों के लिए बड़ी राहत, 20 अक्टूबर से गुलजार होगी कुटुमसर गुफा...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांचक पर्यटन स्थलों के दीवाने पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा के दरवाजे इस बार तय समय से 12 दिन पहले ही पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे। मानसून के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में आवाजाही बंद कर दी जाती है, लेकिन इस बार अनुकूल मौसम और जल्दी छंटते बादलों के चलते 20 अक्टूबर से ही जिप्सी सफारी का संचालन शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से त्योहारी सीजन में बस्तर घूमने का प्लान बना रहे लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा।
मानसून के बाद जल्दी शुरू होगा रोमांचक सफर
पारंपरिक रूप से हर साल एक नवंबर से इस क्षेत्र में जिप्सी सफारी की शुरुआत होती है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से वर्षा ऋतु के कारण सुरक्षा और रास्तों की खराब स्थिति को देखते हुए 17 जून से इस पर रोक लगाई गई थी। इस बार मौसम के समय से पहले सुधरने के कारण उद्यान प्रबंधन ने अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में ही पर्यटकों का प्रवेश बहाल करने का फैसला किया है। घने जंगलों, घुमावदार रास्तों और वन्यजीवों की मौजूदगी के बीच से गुजरने वाला यह जिप्सी सफर सैलानियों के लिए किसी रोमांचक अनुभव से कम नहीं होता है।
भूगर्भीय आश्चर्य और प्राकृतिक धरोहर का अनूठा संगम
यह भूमिगत गुफा अपनी अनूठी चूना-पत्थर की संरचनाओं के लिए पूरे देश में जानी जाती है। हजारों वर्षों की प्राकृतिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप यहां चट्टानों की बेहद अद्भुत आकृतियां विकसित हुई हैं। विज्ञान की भाषा में इन्हें स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट कहा जाता है, जो छत और जमीन से एक-दूसरे की तरफ बढ़ती हुई नजर आती हैं। गुफा के भीतर का घना अंधेरा, रहस्यमयी माहौल और नमी इसे देश-विदेश के शोधार्थियों, भूगर्भ प्रेमियों और आम पर्यटकों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र बनाते हैं।
सुरक्षा नियमों और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
सैलानियों की सुरक्षा और वन क्षेत्र के संरक्षण के लिए वन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। भ्रमण के दौरान सभी आगंतुकों को विभागीय मार्गदर्शिकाओं और तैनात गाइडों के निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। इसके अलावा पर्यटकों से यह भी विशेष अनुरोध किया गया है कि वे जंगल के भीतर प्लास्टिक, पॉलिथीन या किसी भी प्रकार का कचरा न फैलाएं, ताकि वहां की जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन सुरक्षित बना रहे।
स्थानीय आर्थिकी को मिलेगी मजबूती
लंबे समय बाद पर्यटन गतिविधियों के सुचारू होने से बस्तर के स्थानीय कारोबार को भी एक नई रफ्तार मिलने की पूरी उम्मीद है। जिप्सी चालकों, स्थानीय गाइडों, होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों के लिए यह सीजन काफी लाभप्रद साबित हो सकता है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक गौतम नारायण पडिभार के अनुसार, इस बार पर्यटकों की शुरुआती आवाजाही से स्थानीय आर्थिकी को गति मिलेगी और बस्तर के पर्यटन नक्शे पर यह क्षेत्र एक बार फिर प्रमुखता से उभरेगा।
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