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कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में अनूठी पहल : मुनगा पौधारोपण से घर-घर पहुंचेगा पोषण का संदेश.....

Jul 8
2 min read

  • महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के आह्वान पर बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के तहत विशेष अभियान

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से -

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और स्वस्थ छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण संवर्धन को जनआंदोलन बनाने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के आह्वान पर प्रदेशभर में कुपोषण और एनीमिया के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। बेमेतरा जिले में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत आयोजित "मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी अभियान" ने पोषण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का प्रभावी संदेश दिया।

बेमेतरा जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब), सेक्टर दाढ़ी-2 एवं सेक्टर कन्हेरा में अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान गंभीर कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा एनीमिक महिलाओं के 18 घरों में मुनगा के पौधे रोपे गए और परिवारों को पौधों की देखभाल एवं नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।


मुनगा (सहजन) को "सुपर फूड" के रूप में जाना जाता है। इसकी पत्तियों, फलियों और फूलों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए, विटामिन-सी तथा अनेक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका नियमित सेवन गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार, एनीमिया की रोकथाम तथा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक होता है। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान हितग्राहियों को मुनगा के पोषण एवं औषधीय महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।


अभियान को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि "विथ सेल्फी अभियान" के माध्यम से लोगों को इस जनअभियान का सक्रिय सहभागी बनाया गया। इससे पौधों के संरक्षण और नियमित उपयोग के प्रति लोगों में सकारात्मक जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया। विभाग का मानना है कि जब प्रत्येक परिवार अपने घर में पोषण देने वाले पौधे लगाएगा और उनका उपयोग करेगा, तब कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।


महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जागरूकता से जीती जा सकती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर बच्चों, किशोरियों और माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में ऐसे नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कार्यक्रम में सेक्टर सुपरवाइजर, मिशन शक्ति की जेंडर विशेषज्ञ, सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक , आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।



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