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AI और फार्मास्युटिकल साइंस पर इंदौर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन...

Aug 8
5 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

इंदौर :- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से स्वास्थ्य और फार्मास्युटिकल क्षेत्र की कार्यप्रणाली को बदल रहा है। इसी बदलती तकनीकी दुनिया में AI की भूमिका, संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा के लिए इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी (IIP) में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। IIST ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के इस संस्थान ने ब्रिटेन की बायोवेंस सॉल्यूशंस के सहयोग से शुक्रवार को सम्मेलन का उद्घाटन किया।


सम्मेलन का विषय “AI-इनेबल्ड ग्लोबल ड्रग डेवलपमेंट इकोसिस्टम: इंटीग्रेटिंग इंटेलिजेंस अक्रॉस ड्रग डिस्कवरी, क्लिनिकल रिसर्च, रेगुलेटरी साइंस एंड पेशेंट सेफ्टी” रखा गया है। सम्मेलन का उद्देश्य फार्मास्युटिकल विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में देश-विदेश से शिक्षाविदों, नियामक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं, शोधकर्ताओं, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान ड्रग डिस्कवरी से लेकर क्लिनिकल रिसर्च, नियामक प्रक्रियाओं और मरीजों की सुरक्षा तक AI के संभावित प्रभावों पर चर्चा की जा रही है।


AI को लेकर विशेषज्ञों का जुटान फार्मास्युटिकल क्षेत्र में किसी नई दवा को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। इसमें रिसर्च, दवा की खोज, परीक्षण, क्लिनिकल ट्रायल, नियामकीय मंजूरी और मरीजों की सुरक्षा जैसे कई चरण शामिल होते हैं। ऐसे में AI आधारित तकनीक इन प्रक्रियाओं को अधिक तेज, डेटा आधारित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी विषय को सम्मेलन के केंद्र में रखा गया है। विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि किस तरह AI का इस्तेमाल बड़े स्तर पर उपलब्ध मेडिकल और वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण करने, नई दवाओं की संभावनाओं को पहचानने और रिसर्च प्रक्रिया को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।


सम्मेलन में यह भी चर्चा हो रही है कि AI को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अपनाते समय डेटा की गुणवत्ता, मरीजों की गोपनीयता, नैतिकता और नियामकीय मानकों का किस तरह ध्यान रखा जाए। PCI अध्यक्ष ने किया उद्घाटन सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. मोंटू के. पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं PCI की एजुकेशन रेगुलेशंस कमिटी (ERC) के चेयरमैन डॉ. दीपेंद्र सिंह गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर मौजूद रहे।


अपने संबोधन में डॉ. मोंटू के. पटेल ने फार्मेसी शिक्षा और पेशेवर प्रैक्टिस को मजबूत करने में AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच फार्मेसी क्षेत्र को भी नई तकनीकों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। उनके अनुसार, आने वाले समय में AI केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फार्मेसी शिक्षा, रिसर्च और पेशेवर कामकाज का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल बदलाव की जरूरत सम्मेलन में फार्मेसी शिक्षा के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक तकनीकों और डिजिटल टूल्स से भी परिचित कराना जरूरी है।


AI के इस्तेमाल से छात्रों को रिसर्च डेटा के विश्लेषण, वैज्ञानिक साहित्य की समीक्षा और नए शोध विषयों को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार AI को शिक्षक और शोधकर्ता का विकल्प मानने के बजाय एक सहायक तकनीक के रूप में विकसित करना ज्यादा उपयोगी होगा। इस दिशा में शिक्षण संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण प्रणाली में भी बदलाव करने की जरूरत महसूस की जा रही है। ड्रग डिस्कवरी में AI की संभावनाएं नई दवा की खोज में कई साल लग सकते हैं और इसके लिए बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करना पड़ता है। AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें बड़ी मात्रा में उपलब्ध डेटा से पैटर्न और संभावित परिणामों की पहचान करने में मदद कर सकती हैं। सम्मेलन में विशेषज्ञ इस बात पर विचार कर रहे हैं कि AI की मदद से संभावित ड्रग कैंडिडेट्स की पहचान, उनके गुणों का अध्ययन और रिसर्च प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित कैसे बनाया जा सकता है। हालांकि, किसी भी AI आधारित निष्कर्ष को वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञ मूल्यांकन से गुजरना जरूरी होगा।


इसलिए तकनीक के इस्तेमाल के साथ वैज्ञानिक प्रमाण और मानवीय विशेषज्ञता का संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। क्लिनिकल रिसर्च में भी बदल सकता है तरीका AI का इस्तेमाल क्लिनिकल रिसर्च के क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रहा है। मरीजों से संबंधित बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण, संभावित पैटर्न की पहचान और रिसर्च प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने में AI उपयोगी हो सकता है। सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्लिनिकल रिसर्च को अधिक प्रभावी और डेटा आधारित बनाने के लिए AI की क्षमताओं का किस तरह उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ मरीजों की निजता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। रेगुलेटरी साइंस और मरीजों की सुरक्षा फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नियामकीय प्रक्रियाएं दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में AI के इस्तेमाल से नियामकीय डेटा के विश्लेषण और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित करने की संभावनाओं पर भी सम्मेलन में विचार किया जा रहा है। वहीं, मरीजों की सुरक्षा को AI आधारित ड्रग डेवलपमेंट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।


विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि नई तकनीक को अपनाने के बावजूद अंतिम लक्ष्य मरीजों के लिए सुरक्षित और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना होना चाहिए। इंडस्ट्री और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों की मौजूदगी से अकादमिक और इंडस्ट्री क्षेत्र के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा का अवसर मिला। फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं को रिसर्च और तकनीकी नवाचार के जरिए हल करने के लिए दोनों क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी माना जा रहा है। विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के बीच विचारों के आदान-प्रदान से नए शोध सहयोग और तकनीकी परियोजनाओं की संभावनाएं भी बन सकती हैं।


विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं के लिए अवसर दो दिवसीय सम्मेलन में विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्हें AI, फार्मास्युटिकल रिसर्च और आधुनिक ड्रग डेवलपमेंट से जुड़े नए विचारों को समझने का अवसर मिल रहा है। विशेषज्ञों के साथ संवाद से छात्र यह समझ सकेंगे कि आने वाले समय में फार्मेसी और हेल्थकेयर क्षेत्र में तकनीकी दक्षता कितनी महत्वपूर्ण होगी। इंदौर में आयोजित यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब AI का प्रभाव स्वास्थ्य क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में लगातार बढ़ रहा है।


ड्रग डिस्कवरी, क्लिनिकल रिसर्च, नियामकीय विज्ञान और मरीजों की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल को लेकर हो रही चर्चा यह संकेत देती है कि भविष्य की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री तकनीक और मानवीय विशेषज्ञता के संयुक्त मॉडल पर आगे बढ़ सकती है। सम्मेलन के जरिए विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों के बीच इसी संभावित बदलाव को समझने और उसे दिशा देने की कोशिश की जा रही है।

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