फॉर्म-7 के जरिए 15 हजार नाम काटने की साजिश? राहुल गांधी के गंभीर आरोपों से गरमाई सियासत...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली: कर्नाटक के बेलगावी से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और नाम कटवाने की एक गंभीर कोशिश का मामला सामने आया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि बेलगावी में सोची-समझी रणनीति के तहत करीब 15,000 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का प्रयास किया गया है। इसके लिए 'फॉर्म-7' (Form-7) का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किए जाने का दावा किया जा रहा है।
तीन दिनों में आए हजारों आवेदन, खास वर्गों को निशाना बनाने का दावा -
राहुल गांधी के मुताबिक, 22 से 24 सितंबर के बीच सिर्फ तीन दिनों के भीतर बेलगावी में हजारों की संख्या में फॉर्म-7 के आवेदन जमा कराए गए। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत विशेष रूप से मुस्लिम, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़े मतदाताओं को टारगेट किया गया है।
इस बीच, बेलगावी के वीरभद्र नगर मतदान केंद्र की एक घटना ने इस विवाद को और हवा दे दी है। आरोप है कि खुद को नगर निगम (सिटी कॉरपोरेशन) का कर्मचारी बताने वाले दो लोग एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास पहुंचे और लगभग 200 फॉर्म-7 आवेदनों पर जबरन हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। हालांकि, सतर्क बीएलओ ने खुद मैपिंग का हवाला देते हुए इन फर्जी आपत्तियों पर साइन करने से साफ इनकार कर दिया।
बीएलओ की सूझबूझ और कानूनी कार्रवाई -
फॉर्म-7 का उपयोग आमतौर पर मतदाता सूची में किसी नाम पर आपत्ति जताने या उसे हटाने के लिए किया जाता है। लेकिन इस मामले में इसका गलत इस्तेमाल करने की बात सामने आ रही है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मामले में पुलिस एक्शन शुरू हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, 198 मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से हटवाने के प्रयास के आरोप में बीजेपी नेता डॉ. रवि पाटिल और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। कर्नाटक के अन्य हिस्सों से भी फॉर्म-7 के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही हैं, जिस पर पुलिस और निर्वाचन आयोग ने जांच तेज कर दी है।
राजनीतिक घमासान और चुनाव आयोग पर सवाल -
इस पूरे प्रकरण ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर फर्जी आवेदनों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, राहुल गांधी ने सॉफ्टवेयर के जरिए केंद्रीकृत तरीके से फॉर्म तैयार करने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की अपनी मांग को फिर से दोहराया है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी राजनीतिक फायदे के लिए बेबुनियाद और प्रेरित आरोप लगा रही है, जबकि मतदाता सूची में संशोधन पूरी तरह चुनाव आयोग के तय नियमों के तहत ही होता है।
फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस और चुनाव अधिकारियों की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि फॉर्म-7 के इस कथित खेल के पीछे असल मास्टरमाइंड कौन था।






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