oशासकीय भूमि पर अतिक्रमणo oस्थगन आदेश को दिखाया ठेंगाo oबेधड़क निर्माणo

महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लाक के बामड़ाडीह पंचायत का यह मामला जो अतिक्रमण कर भवन बना रहे है।यह शासकीय भूमि जो गांव के शासकीय स्कूल से सटा हुआ हृदय स्थल पर है।शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण करने वाले डोलामणि पिता रमेश, हेमंत कुमार पिता रमेश, रमेश पिता लालसा, मोहित पिता जय भारत, रोहित पिता जय भारत, बिहारी पिता दीवान, प्रभाकर पिता पुर्नो, सभी निवासी बामड़ाडीह, तहसील पिथौरा, जिला महासमुंद के हैं। इन लोगों के द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण के दुस्साहस पूर्ण कृत्य को गांव के लोगों के आपत्ति के बावजूद निर्माण जारी रखा।सभी के मना करने के बावजूद किसी की ना मानी।ग्रामीण जनो के कहने पर ग्राम पंचायत में कार्यवाही करने हेतु दिनांक 4 मार्च 2020 को सर्व सम्मति से प्रस्ताव को पारित किया गया। यह भूमि खसरा नंबर 687/ 593 जो सार्वजनिक हित के लिए एवं बच्चों के खेल मैदान हेतु आरक्षित था।

उन अतिक्रमणकारियों पर पूरा ग्राम पंचायत आक्रोशित हो एकजुट होकर हर हाल में निर्माण बंद कराने हेतु लामबंद हो गए। पंचायत ने कार्यवाही हेतु तहसीलदार पिथोरा को 13 फरवरी 2020 को ग्रामीण जन के हस्ताक्षर युक्त आवेदन किया था ।हल्का पटवारी द्वारा 15-02-2020 को अतिक्रमण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया नायब तहसीलदार पिथौरा के नामें जिसमें हल्का पटवारी ने 19 × 37 मीटर उक्त भूमि अनावेदक द्वारा बाउंड्री व मकान बनाना अतिक्रमण करना पाए जाने की बात लिखी गई थी। हल्का पटवारी सरपंच एवं ग्रामीण जन के समक्ष पंचनामा कर नायब तहसीलदार पिथौरा को प्रस्तुत किया।

दिनांक 6 मार्च 2020 को स्थगन आदेश जारी किया 7 लोगों के विरुद्ध।प्रति लिपि भेजी गई 1, थाना बसना 2,हल्का पटवारी नंबर 42 तथा 3,सरपंच ग्राम पंचायत बामड़ाडीह को कार्यवाही एवं सूचनार्थ प्रेषित किया। उक्त आदेश के बावजूद भी आज पर्यंत तक निर्माण बेधड़क जारी है। जिसके लिए सरपंच सचिव पंचायत एवं ग्रामीण जन थाना बसना, तहसीलदार पिथौरा में गुहार लगाने हेतु जा चुके थे,किंतु स्थगन आदेश को ठेंगा दिखाकर अतिक्रमण कारी अतिक्रमण करते रहे । प्रशासन के जिम्मेदार लोगों में से किसी ने भी कोई कार्यवाही नहीं की ।उक्त सारी बातें सरपंच बामड़ाडीह श्रीमती लता सागर ने पंच गण एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में साक्षात्कार देते हुए बताया।

आश्चर्य का विषय है कि ग्राम बामड़ाडीह ही नहीं पुर पंचायत एक स्वर में जिस अवैध निर्माण का विरोध कर रहा है उसकी सुनवाई व कार्यवाही शासन-प्रशासन द्वारा न किया जाना जनहित के कार्य पर एवं अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है? यहां यह बताना जरूरी है कि ग्राम पंचायत बामड़ाडीह में जनहित के कार्य हेतु एक इंच शासकीय भूमि नही है। जो कुछ भी शासकीय भूमि थी 7 लोगों ने अलग-अलग जगह पर अतिक्रमण कर लिया है। साथ ही ग्राम पंचायत के 3 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर खेती किसानी कर रहे हैं।
यहां यह बताना लाजमी होगा की बामड़ाडीह पंचायत के ग्रामीण जन एवं सरपंच, पंचगण एवं 9 महिला समिति की महिलाएं आदि लोग अधिकारी व प्रशासन के रवैए से ख़ासा नाराज हैं। उन्हें हर हाल में अतिक्रमित शासकीय भूमि खाली चाहिए जो कि गांव के उत्थान हेतु शासकीय भवन एवं बच्चों के खेल मैदान के ना होने तथा अपने बच्चों के भविष्य को अंधकार मय रुप मे पा कर अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अतः सभी ग्रामीण जनों ने त्वरित कार्यवाही ना होने पर अनशन से लेकर कानूनी कार्यवाही करने पर आमादा होने के बाद आक्रोशित होकर कही कोई ऐसा काम ना कर बैठे जिसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।

ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन अतिक्रमणकारियों में से एक शासकीय कर्मी है जो झोला छाप डाक्टरी भी करता है।विगत वर्षों में उक्त झोला छाप डॉक्टर के हांथो कई केस बिगड़े जिसे बसना या रायपुर भेज कर अपना उल्लू सीधा किया है।
अब देखना यह है कि इस ग्राम पंचायत में रहने वाले ग्रामीण जनों कि कौन कब सुध लेता है एवं अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जनहित में क्या कार्य करता है?






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