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बाथरूम में घुसा 7 फीट लंबा मगरमच्छ....

Jul 30
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

गुजरात के आणंद जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां आधी रात को एक रिहायशी मकान के बाथरूम में करीब सात फीट लंबा मगरमच्छ घुस आया। परिवार के लोग उस समय गहरी नींद में सो रहे थे और उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनके घर के भीतर इतना खतरनाक वन्यजीव मौजूद है। कुत्तों के लगातार भौंकने से परिवार को कुछ अनहोनी का आभास हुआ और जब घर के मालिक ने बाहर निकलकर जांच की तो बाथरूम के अंदर मगरमच्छ को देखकर उनके होश उड़ गए। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।


यह घटना आणंद जिले के सोजित्रा तालुका के त्रंबोवाड-खड़ियारापुरा क्षेत्र की है। बुधवार देर रात करीब 11 बजे परिवार के सदस्य अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान घर के बाहर मौजूद कुत्ते लगातार भौंकने लगे। पहले तो परिवार ने इसे सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब काफी देर तक कुत्तों का भौंकना जारी रहा तो मकान मालिक बालाभाई चौहान बाहर निकलकर स्थिति देखने पहुंचे। घर के आसपास देखने के बाद उन्होंने बाथरूम का दरवाजा खोला। जैसे ही उनकी नजर अंदर गई, वे स्तब्ध रह गए। बाथरूम के फर्श पर करीब सात फीट लंबा मगरमच्छ बैठा हुआ था। अचानक इतनी नजदीक मगरमच्छ को देखकर उन्होंने तुरंत पीछे हटकर परिवार के अन्य सदस्यों को सतर्क किया। कुछ ही देर में पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग भी मौके पर एकत्र होने लगे।


परिवार ने बिना समय गंवाए वन विभाग को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हुआ और वन रक्षक निलेश भरवाड़ तथा मनीष प्रजापति के नेतृत्व में दया फाउंडेशन की रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा गया। रेस्क्यू टीम में संस्था के अध्यक्ष नितेश चौहान और स्वयंसेवक तुषार राणा भी शामिल थे। रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मगरमच्छ बाथरूम जैसी बेहद संकरी जगह में बैठा हुआ था। ऐसे में किसी भी तरह की जल्दबाजी मगरमच्छ और लोगों दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती थी। टीम ने पूरी सावधानी और पेशेवर तरीके से अभियान शुरू किया। लगभग एक घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से काबू में कर लिया गया।


वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने मगरमच्छ को पकड़ने के बाद किसी प्रकार की चोट पहुंचाए बिना सुरक्षित वाहन में रखा और उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी की। बाद में मगरमच्छ को पास के मलातज गांव स्थित तालाब में छोड़ दिया गया, जहां उसका प्राकृतिक आवास है। दया फाउंडेशन के अध्यक्ष नितेश चौहान ने बताया कि वन विभाग से सूचना मिलते ही उनकी टीम तुरंत मौके पर पहुंची। उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाके में मगरमच्छ का प्रवेश लोगों के लिए खतरनाक हो सकता था, इसलिए पूरी सतर्कता के साथ अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि सफल रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।


वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। लगातार बारिश के कारण तालाब, नदियां और अन्य जलाशय भर जाते हैं। जलस्तर बढ़ने पर मगरमच्छ भोजन की तलाश या अनुकूल स्थान की खोज में पानी से बाहर निकल आते हैं और कई बार रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिस मलातज तालाब में मगरमच्छ को छोड़ा गया है, वहां पहले से ही 100 से अधिक मगरमच्छ मौजूद हैं। भारी वर्षा और जलभराव के दौरान इनका आसपास के गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचना असामान्य नहीं माना जाता। इसलिए बारिश के मौसम में लोगों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में मगरमच्छ दिखाई दे तो उसे पकड़ने, भगाने या उसके पास जाने की कोशिश बिल्कुल न करें। ऐसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।


किसी भी ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें ताकि वन्यजीव और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मानसून के दौरान वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं और मानव बस्तियों के पास उनका पहुंचना संभव है। समय पर दी गई सूचना और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई के कारण इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने भी रेस्क्यू टीम की तत्परता और पेशेवर कार्यशैली की सराहना की है। अब वन विभाग आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।

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