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5 म्यूल अकाउंट धारक गिरफ्तार, साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन...

Aug 11
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

जांजगीर-चांपा :- छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में साइबर थाना पुलिस ने म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए देशभर में साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित करने वाले आरोपियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने पांच म्यूल खाता धारकों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 33 साइबर फ्रॉड के मामलों में किया गया था। इन मामलों में कुल करीब 10 करोड़ 18 लाख 19 हजार 809 रुपये की साइबर ठगी सामने आई है। वहीं आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए म्यूल खातों में ठगी से संबंधित करीब 66 लाख 557 रुपये ट्रांसफर किए जाने की जानकारी पुलिस जांच में सामने आई है।


पुलिस के अनुसार, आरोपी आर्थिक लाभ और कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा दी जाती थी। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को जमा कराने और फिर उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए करते थे। इस तरह ठगी की रकम के वास्तविक स्रोत और मुख्य आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय की गाइडलाइन और पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देशों के तहत साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और उपलब्ध डिजिटल जानकारी का विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों का कनेक्शन देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 33 साइबर फ्रॉड मामलों से सामने आया।


पुलिस जांच में इन म्यूल खातों का संबंध देश के 11 राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से मिला। इनमें आंध्रप्रदेश के 4, गोवा के 2, गुजरात के 5, हिमाचल प्रदेश के 2, कर्नाटक के 6, महाराष्ट्र के 3, राजस्थान के 2, तेलंगाना के 4, उत्तर प्रदेश के 2, पश्चिम बंगाल के 1 और छत्तीसगढ़ के 2 साइबर अपराध शामिल हैं। इन सभी मामलों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। पूछताछ के दौरान आरोपी तुषार सिंह राठौर, ओम प्रकाश केंवट और सत्यनारायण आदित्य ने पुलिस को बताया कि संदीप चंद्रा और उसके साथियों ने कमीशन का लालच देकर उनसे बैंक खाते खुलवाए थे। आरोपियों के मुताबिक बैंक खाते और मोबाइल नंबर चालू करवाने के बाद इन्हें साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया गया। इसके बदले खाताधारकों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है।


पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि संदीप चंद्रा वर्तमान में बिलासपुर रेंज के साइबर थाने में दर्ज एक साइबर फ्रॉड मामले में केंद्रीय जेल में निरुद्ध है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनसे जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटाने में लगी है। जांच का उद्देश्य म्यूल खातों का इस्तेमाल करने वाले मुख्य साइबर अपराधियों तक पहुंचना और ठगी की रकम के लेन-देन की पूरी कड़ी का पता लगाना है।


इन पांच आरोपियों की गिरफ्तारी


पुलिस ने मामले में सत्यनारायण आदित्य निवासी ग्राम किकिरदा, थाना बिर्रा, जिला जांजगीर-चांपा, तुषार सिंह राठौर निवासी ग्राम फरसवानी, थाना उरगा, जिला कोरबा, हरिश कुमार देवांगन निवासी सिवनी, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा, ओम प्रकाश केंवट निवासी फरसवानी, थाना उरगा, जिला कोरबा और मनोज कुमार मांझी निवासी चांपा, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना जांजगीर-चांपा में अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत धारा 61(2), 317(4), 317(5), 318(4) और 323 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिन्हें कोई व्यक्ति कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में साइबर अपराधियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराता है। साइबर ठग इन खातों में धोखाधड़ी से हासिल रकम जमा कराते हैं और फिर उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।


कई मामलों में रकम अलग-अलग खातों से होकर गुजरती है, जिससे पुलिस के लिए वास्तविक साइबर अपराधियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जानबूझकर अपना बैंक खाता साइबर अपराध के लिए उपलब्ध कराना भी गंभीर और दंडनीय अपराध हो सकता है। केवल यह कहना कि खाते का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति ने किया, कानूनी जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं बनता। ऐसे मामलों में खाताधारक की भूमिका और उसकी जानकारी के आधार पर जांच की जाती है। साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित जानकारी उपलब्ध न कराएं। बैंक खाते को किसी दूसरे व्यक्ति के साइबर लेन-देन के लिए इस्तेमाल करने देना गंभीर परेशानी में डाल सकता है।


पुलिस ने लोगों से कहा है कि यदि उनके साथ ऑनलाइन वित्तीय ठगी होती है तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस के मुताबिक शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को संबंधित खातों में होल्ड कराने और उसे वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है। इस कार्रवाई के बाद साइबर थाना पुलिस ने एक बार फिर लोगों को बैंकिंग जानकारी की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।

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