शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती: रायपुर में दिग्गजों ने किया अमर बलिदानी को नमन....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
रायपुर: देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमने वाले अमर शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शंकर नगर स्थित एसआरपी चौक पर वीर भगत सिंह की प्रतिमा के समक्ष एक विशेष पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
यह आयोजन रायपुर नगर निगम के संस्कृति विभाग, जोन 4 और छत्तीसगढ़ सिख समाज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस मौके पर रायपुर दक्षिण के विधायक सुनील सोनी, नगर निगम महापौर मीनल चौबे, सभापति सूर्यकांत राठौड़ और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में पहुंचकर देश के इस महान सपूत को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इस दौरान नगर निगम के संस्कृति विभाग अध्यक्ष अमर गिदवानी, जल कार्य विभाग अध्यक्ष संतोष साहू, राजस्व विभाग अध्यक्ष अवतार सिंह बागल, एल्डरमैन राजू राघवानी और छत्तीसगढ़ प्रदेश सिख समाज के अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इनके साथ ही सिख समाज के कई अन्य पदाधिकारी— देवेंद्र सिंह चावला, स्वर्ण सिंह चावला, नरेंद्र सिंह चावला, सुरजीत सिंह छाबड़ा, इकबाल सिंह सलूजा, हरविंदर सिंह, राजू छाबड़ा, मनजीत सिंह भाटिया, इंद्रजीत सिंह इस्सर, अमरीक सिंह सूर, नरेंद्र सिंह हरगोत्रा, कुलवंत सिंह खालसा और मनप्रीत सिंह घंजल ने भी शहीद भगत सिंह के बलिदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
मात्र 24 वर्ष की उम्र में दिया था सर्वोच्च बलिदान -
28 सितंबर 1907 को पंजाब के खटकड़कलां गांव में जन्मे भगत सिंह भारत के क्रांतिकारी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। देश में गणतंत्र की स्थापना के लिए उन्होंने 'हिन्दुस्तानी समाजवादी प्रजातंत्र संघ' का गठन किया था। लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए अंग्रेज अफसर सांडर्स का वध और केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने जैसी घटनाओं ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। देश की आजादी के लिए लड़ते हुए मात्र 24 साल की छोटी सी उम्र में वे वीरगति को प्राप्त हुए।
रायपुर नगर निगम द्वारा हर साल सिख समाज के सहयोग से 28 सितंबर (जयंती) और 23 मार्च (शहादत दिवस) के अवसर पर एसआरपी चौक स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर यह पुष्पांजलि कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा ले सकें।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)











Comments