google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

1.20 लाख वेबसाइटों और 75 हजार ऐप्स पर स्पाईवेयर का खतरा...

6 hours ago
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नई दिल्ली :- टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब की जांच में विज्ञापनों के जरिए मोबाइल और कंप्यूटर तक जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश के रिकॉर्ड मिले हैं। जांच में 1.20 लाख से अधिक वेबसाइटों और 75 हजार से ज्यादा ऐप का जिक्र है। के मुताबिक, यह गतिविधि 161 देशों तक फैली थी और कुछ विज्ञापन अंतरराष्ट्रीय संगठनों व सरकारी नेटवर्क तक पहुंचे। हालांकि, ये रिकॉर्ड संभावित निशानों से जुड़े हैं। इनसे यह साबित नहीं होता कि सभी संबंधित डिवाइस हैक हो गए थे।


टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब की जांच में एक ऐसे नेटवर्क का पता चला है, जिस पर सामान्य विज्ञापनों के जरिए मोबाइल फोन और कंप्यूटर तक जासूसी करने वाला सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश का आरोप है। इस मामले में इजराइली कंपनी डिस्कवर टेक का नाम सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस तरीके में लोगों को विज्ञापन पर क्लिक करने की जरूरत नहीं थी। कुछ मामलों में विज्ञापन स्क्रीन पर नजर आए बिना भी उससे जुड़ा कोड डिवाइस तक पहुंच सकता था।


जांच के दौरान 1.20 लाख से अधिक वेबसाइटों और 75 हजार से ज्यादा ऐप पर ऐसे विज्ञापनों से जुड़े रिकॉर्ड मिले। इनमें भारत में इस्तेमाल होने वाले ट्रूकॉलर, एमएक्स प्लेयर और लूडो स्टार जैसे ऐप भी शामिल बताए गए हैं। जांच में सामने आए तरीके के अनुसार, विज्ञापन के साथ जुड़े कोड से यह पता लगाने की कोशिश की जाती थी कि कोई व्यक्ति किन ऐप या वेबसाइटों का इस्तेमाल करता है। इसके साथ डिवाइस से जुड़ी कुछ जानकारियां भी जुटाई जा सकती थीं। इस जानकारी के आधार पर चुनिंदा मोबाइल या कंप्यूटर को निशाना बनाने की कोशिश होती थी। इसके बाद संबंधित डिवाइस तक जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने का प्रयास किया जा सकता था। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी संबंधित यूजर को होना जरूरी नहीं था।


रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हर व्यक्ति को एक जैसा कोड नहीं भेजा जाता था। अलग-अलग डिवाइस के लिए अलग तरीके अपनाए जाने से ऐसी गतिविधियों की पहचान करना मुश्किल हो सकता था। सिटिजन लैब की जांच के मुताबिक, डिस्कवर टेक से जुड़े विज्ञापन 161 देशों में दिखाए जाने के रिकॉर्ड मिले। कंपनी के एक सर्वर पर जनवरी से जून 2026 के बीच 36.4 लाख से अधिक संभावित यूजर्स से संबंधित रिकॉर्ड दर्ज थे। इन आंकड़ों से इस नेटवर्क के बड़े दायरे का संकेत मिलता है। हालांकि, रिपोर्ट में दर्ज संभावित यूजर्स की संख्या को सीधे हैक हुए लोगों की संख्या नहीं माना जा सकता।


विज्ञापन से जुड़े रिकॉर्ड मिलना और किसी डिवाइस में सफलतापूर्वक जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंच जाना दो अलग बातें हैं। जांच में 'डार्क कार्टोग्राफर' नाम के एक अन्य समूह का भी जिक्र किया गया है। इस समूह पर विज्ञापनों के जरिए 30 से अधिक देशों में लोगों के मोबाइल नंबर का पता लगाने की कोशिश करने का आरोप है। इससे पता चलता है कि जांच में केवल डिवाइस तक सॉफ्टवेयर पहुंचाने से जुड़ी गतिविधियां ही नहीं, बल्कि विज्ञापनों के माध्यम से लोगों की पहचान से संबंधित जानकारी जुटाने के प्रयास भी सामने आए।


जांचकर्ताओं को बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, फॉक्स न्यूज, सीबीसी और याहू जैसी वेबसाइटों पर संदिग्ध विज्ञापन दिखने के रिकॉर्ड मिले। इसके अलावा अमेरिका के रक्षा विभाग, स्वीडन के सशस्त्र बलों और नॉर्वे की पुलिस के नेटवर्क तक विज्ञापन पहुंचने की बात भी सामने आई। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के नेटवर्क पर भी ऐसे विज्ञापनों के रिकॉर्ड मिलने का उल्लेख है। कई देशों के सरकारी कार्यालयों और चुनावों की निगरानी करने वाली संस्थाओं के नेटवर्क भी इस जांच में सामने आए। हालांकि, किसी वेबसाइट या सरकारी नेटवर्क पर विज्ञापन का रिकॉर्ड मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां के सिस्टम हैक कर लिए गए थे।


रिपोर्ट के अनुसार, डिस्कवर टेक वर्ष 2020 से गूगल की प्रमाणित विज्ञापन कंपनियों की सूची में शामिल थी। सिटिजन लैब की जांच में सामने आए निष्कर्षों के बाद गूगल ने कंपनी को इस सूची से हटा दिया। इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि सामान्य दिखने वाले ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए डिवाइस की जानकारी जुटाने या जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, जांच में मिले विज्ञापन रिकॉर्ड, संभावित निशाने और वास्तव में हैक हुए डिवाइसों की संख्या को अलग-अलग समझना जरूरी है।


Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html