००करोड़ो रूपये कमाने वाले लेबर ठेकेदार और दलाल सुध नही ले रहे मजदूरों की।

००करोड़ो रूपये कमाने वाले लेबर ठेकेदार और दलाल सुध नही ले रहे मजदूरों की।००
यही ठेकेदार एवं दलाल मजदूरों की वापसी पर कुंभकरण की नींद सोए हैं ।भटकते भटकते येन केन प्रकारेण ये निरीह मजदूर घर वापसी की राह पर है।कोई उनकी सुध नहीं ले रहा। यही ठेकेदार यही दलाल गांव-गांव घूमकर उन्हें लुके छुपे, चोरी चोरी कब भेज देते हैं, जिसकी सरकार तक को पूरी जानकारी नहीं रहती ।आज इस बात से भी पर्दा उठ गया है के मजदूरों का पलायन लाखों की तादाद में होने के पुख्ता सबूत जो मजदूरों के कोरोना वायरस के चलते मजदूरों के घर वापसी से उजागर हुआ है। छत्तीसगढ़ के कोने कोने से गांव गांव से लाखों लोग ईट बनाने के नाम से पलायन करते हैं इन्हें ईट भट्ठों में भेजने के लिए मजदूर ठेकेदार एवं दलाल होते हैं जो इन्हें एडवांस के रूप में कुछ पैसे देकर उन्हें दूसरे प्रदेश जाने को तैयार करते हैं ।पहले तो यह सिलसिला केवल गर्मी के दिनों में ही किया जाता था,किंतु अब पलायन के लिए कोई खास दिन मुकर्रर नहीं है। गांव घर द्वार छोड़ एक मुश्त बड़ी रकम पाने की लालच में यह मजदूर एक तरह से अपने आपको बेच देता है।

दलाल उन मजदूरों की पसीने की गाढ़ी कमाई से अपनी दलाली लेता है जिसका कहीं कोई हिसाब नहीं होता इस क्षेत्र में करोड़ पति अरबपति दलाल है जिनके कमाई पर कोई हिसाब नहीं कोई टैक्स नहीं। वही दलाल एवं मजदूर ठेकेदार आज मजदूरों की वापस पर बिल्कुल गूंगे बहरे हो चले हैं ।आश्चर्य का विषय है कि शासन प्रशासन उन प्रवासी मजदूरों से यह भी नहीं पूछ रहा है कि वे लोग किन के द्वारा भेजे गए थे। यही एक मौका है जब मजदूर ठेकेदार और दलालों के नाम सामने आने की।
इस कोरोनावायरस संक्रमण समय में प्रवासी मजदूरों की वापसी और उन की खैर खबर भी ये मजदूर ठेकेदार और दलाल नहीं लेना चाह रहे हैं ।ये प्रवासी मजदूर उन ठेकेदार और दलालों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी के मानिंद है फिर भी यह प्रवासी मजदूर की मदद करने के नाम पर अपने आपको सामने नहीं ला रहे हैं। उन्हें पता है डर है कि हमारे ऊपर कभी भी कानूनी शिकंजा कस सकता है ।मजदूर ठेकेदार और दलाल इस मुगालते पर नहीं रहे उन्हें मजदूर जरूर घेरेंगे। मजदूरों को बेबस और लाचार छोड़ देने का हिसाब मजदूर इनसे जरूर लेंगे। बस इंतजार है कोरोनावायरस संक्रमण समय सामान्य होने का |






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