ईट भट्ठे में 5 मजदूरों की अकाल मृत्यु – एक उपचार में
• दम घुटने के कारण मृत्यु की आशंका
• सभी मजदुर एक ही गांव गढ़फुलझर के
• इन पांच मजदूरों की मृत्यु
गंगा राम बिसी (55),
दशरथ बिसी(30),
सोना चंद भोई (40),
वरुण बरिहा(24),
जनक राम बरिहा(35)
और मनोहर बिसी(30)
• अवधूत पाड़े का भट्ठा
• एक ही परिवार के तीन लोग
• कई सवाल खड़े करती है गढ़फुलझर की घटना
प्राप्त सुचना के अनुसार बीते रात को महासमुंद जिले के बसना थाना अंतर्गत ग्राम गढ़फुलझर में ह्रदय विदारक घटना हुई है ईट बना रहे 6 मजदूरों में से 5 की मृत्यु ईट भट्ठे में ईट जलाने की प्रक्रिया के दौरान हो गई है | जिसमे एक व्यक्ति (मनोहर बीसी) घायल है, उसे आनन फानन में जिला चिकित्सालय रिफर किया गया है
ग्रामीणों का कहना है कि ईट निर्माण की यह अंतिम प्रक्रिया जिसे भट्ठे का रूप देकर भूंसे व लकड़ी से जालाया जाता है ईट निर्माण में कच्चे ईट को भट्ठे में तरकीब से रखने के बाद उसमे आग लगाई जाती है इस प्रक्रिया के लिए अलग अलग मजदुर होते है |
विगत रात्रि इस भट्ठे को आग लगाने के बाद सभी मजदुर रात में खाना खाने के बाद उसी भट्ठे पर सो गये चूँकि यह धीरे धीरे अपने शबाब पर आता है तब वहां ऑक्सीजन की कमी संभाव्य है अक्सर मजदुर भट्ठा जलाने के बाद भट्ठे के मालिक से मुर्गा शराब लेते है जो भट्ठा जलाने का दस्तूर बन चूका है
हालात पर गौर करने पर यह जान पड़ता है कि मजदूरों की खुद की लापरवाही से खुद की जान गवां दी
फिर भी ईट भट्ठा निर्माण को लेकर कई सवाल खड़े होते है ?
इस क्षेत्र में ईट भट्ठे की वजह से लाखों पेड़ काट दिए जाते है प्रदुषण पूरी तरह से चरमसीमा पर है यहाँ ईट निर्माण अनुमति से सम्बंधित अधिकारीयों के तो चांदी चांदी होती है
कृषक को स्वयं की आवश्यकता हेतु एक निश्चित मात्रा में ईट निर्माण की अनुमति होती है किन्तु झाड़ काटने की नहीं
चूँकि यह घटना जिनके भट्ठे में हुई है वे कुम्हार (पाड़े) जाति की श्रेणी में आते है, इनका काम खपरा, मटका, ईट निर्माण का होता है परन्तु निर्माण के लिए अनुमति भी आवश्यक होती है
हम आपको बताते चलें कि पिछले साल शासन में इनके भाई चन्द्रशेखर पाड़े माटीकला बोर्ड में अध्यक्ष रह चुके है, उनके कथनानुसार ईट बनाने का मकसद घरेलु उपयोग हेतु स्वयं के मकान निर्माण हेतु था
यह घटना कई सवाल खड़ा करती है ?
मसलन
क्या ईट निर्माण हेतु पर्याप्त अनुमति थी?
क्या वह स्थल निर्माण हेतु उपयुक्त था?
क्या निर्माण की जानकारी खनिज विभाग को थी?
ऐसे कई सवाल खड़े करती है गढ़फुलझर की ये घटना?................
क्षेत्र के हर गांव में ईट निर्माण का काम बिना रोक टोक के चल रहा है
उनका मकसद ईट बनाकर बसना, सरायपाली, पिथौरा, बागबहरा,महासमुंद जैसे शहरों में ऊँचे दामों पर बेंचना, खास कर वर्षा ऋतू में बेंचना होता है | इस हेतु अभी से स्टॉक रखने का प्रक्रिया होता है |
ईट निर्माण हेतु लाखों झाड़ काटे जाते है जिसपर कोई रोक टोक नहीं है, कृषक की आड़ में स्वयं के कृषि जमीन का बताकर बहुत से झाड़ काट दिए जाते है, यहाँ ये बताना लाज़मी होगा कि वृक्ष कटाई को लेकर राजस्व विभाग और वन विभाग दोनों ही ये कहते हुए अपना अपना पल्लू झाड़ते है
वन विभाग का कहना है कि यह राजस्व क मामला है हम केवल ट्रांस्पोर्टिंग करते समय ही कार्यवाही कर सकते है, और राजस्व विभाग इस मामले में पूरा उदासीन रवैय्या अपनाता है |
दोनों की रस्सा कस्सी में ईटा बनाने वालों की चांदी है, तथा वह विभाग जो इसका जिम्मेदार है खनिज विभाग, इन्हें तो अपने वसूली से मतलब है, बाकि समय कुम्भकरणीय निद्रा इन्हें विरासत में मिली है |
आगर ऐसा ही होता रहा तो मानव समाज का विनाश आने वाले चन्द सालों में प्रारम्भ होना ही है जब प्रदुषण चरमसीमा पर होगा तो सांस लेना भी दूभर होगा |
आगे स्वयं देखें कि शासन प्रशासन कब निद्रा से जागते है, या इस तरह के घटना की पुनरावृत्ति की बाट जोही जायेगी |






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)








Comments