World Patient Safety Day 2026: दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा....
-डॉ. प्रदीप शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लिनिकल लीड, इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन, नारायणा हेल्थ एमएमआई अस्पताल, रायपुर.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
हर साल 17 सितंबर को मनाया जाने वाला 'विश्व रोगी सुरक्षा दिवस' (World Patient Safety Day) हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य सेवा केवल असरदार ही नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी होनी चाहिए। इस वर्ष का मुख्य फोकस असंक्रामक रोगों (NCDs) जैसे- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, और कैंसर जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित लोगों की सुरक्षित देखभाल पर है। भारत में करोड़ों परिवार इन बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनका उपचार अक्सर जीवनभर चलता है। ऐसे में दवाओं में गलती, इलाज में अनियमितता या गलत जानकारी से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए, आइए जानते हैं।
बचाव ही है सुरक्षा की पहली सीढ़ी:-
असंक्रामक रोगों का बड़ा हिस्सा केवल हमारी जीवनशैली से जुड़ा है। हरी सब्जियां, फल और संतुलित आहार के साथ-साथ हफ्ते में कम से कम 150 मिनट का व्यायाम बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। तंबाकू और अत्यधिक शराब से दूरी हृदय रोग और कैंसर से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
डॉक्टर की सलाह के साथ सेल्फ-केयर है ज़रूरी:-
मरीजों के लिए सेल्फ-केयर यानी अपनी देखभाल करना बेहद अहम है। इसमें नियमित ब्लड प्रेशर और ग्लूकोज़ चेक करना शामिल है। लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि सेल्फ-केयर कभी भी डॉक्टर की पेशेवर सलाह की जगह नहीं ले सकता। गंभीर लक्षणों जैसे- सीने में दर्द या लगातार असामान्य रीडिंग को कभी नजरअंदाज न करें।
दवाओं के सेवन में रखें विशेष सावधानी:-
दीर्घकालिक बीमारियों के मरीज अक्सर कई तरह की दवाइयां एक साथ लेते हैं। ऐसे में दवाओं का गलत कॉम्बिनेशन नुकसानदायक हो सकता है। मरीजों को अपनी सभी दवाओं की एक अपडेटेड लिस्ट हमेशा साथ रखनी चाहिए और बिना डॉक्टर से पूछे दवा बंद या बदलनी नहीं चाहिए।
नियमित जांच से टलेगा बड़ा खतरा:-
हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी बीमारियां सालों तक कोई लक्षण नहीं दिखातीं, जब तक कि हार्ट अटैक या किडनी फेलियर जैसी नौबत न आ जाए। इसीलिए समय-समय पर जांच कराते रहना एक अहम सुरक्षा रणनीति है।
देखभाल करने वाले भी हैं स्वास्थ्य सेवा में साझेदार:-
बुजुर्ग या गंभीर मरीजों की देखभाल करने वाले परिजनों की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्हें दवा के समय और आपातकालीन स्थितियों को संभालने की सही जानकारी होनी चाहिए।
जागरूक मरीज, सुरक्षित इलाज:-
आज के दौर में मरीजों को इलाज के दौरान सिर्फ मूकदर्शक नहीं रहना चाहिए बल्कि सक्रिय साझेदार बनना चाहिए। मरीजों को बेझिझक अपने डॉक्टर से पूछना चाहिए कि अमुक दवा किसलिए है, इसके साइड इफेक्ट्स क्या हैं और फॉलो-अप के लिए कब आना है।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026 का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा किसी एक की नहीं, बल्कि सबकी साझा जिम्मेदारी है। एक जागरूक मरीज, एक सतर्क परिवार और एक जिम्मेदार स्वास्थ्य प्रणाली मिलकर ही टाले जा सकने वाले नुकसान के खिलाफ सबसे मजबूत दीवार खड़ी कर सकते हैं।





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