उद्योग विभाग की विश्वकर्मा योजना, पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक ट्रेनिंग व टूलकिट...
- ANIS LALA DANI

- 1 day ago
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ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
लखनऊ :- पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और हस्तशिल्पियों के हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए उद्योग विभाग की ओर से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 850 कारीगरों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य बढ़ई, नाई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, सोनार, टोकरी बुनकर, राजमिस्त्री, हलवाई, मोची और धोबी जैसे पारंपरिक कार्यों से जुड़े लोगों को बेहतर प्रशिक्षण देकर उनके कौशल को और मजबूत बनाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से कारीगरों को आधुनिक तकनीक और नए तरीकों की जानकारी दी जाएगी, जिससे वे अपने व्यवसाय को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें।
उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चयनित कारीगरों को 10 दिवसीय निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद संबंधित ट्रेड के अनुसार आधुनिक तकनीक पर आधारित उन्नत किस्म की टूल किट उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण लेने वाले कारीगरों को चार रुपये मानदेय भी दिया जाएगा। योजना के तहत अलग-अलग ट्रेड के कारीगरों का चयन किया जा रहा है। इसी क्रम में हलवाई और धोबी ट्रेड के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। हलवाई ट्रेड के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 20 अगस्त को और धोबी ट्रेड के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 21 अगस्त को होगा।
उपायुक्त उद्योग रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि योजना के तहत अभी तक धोबी ट्रेड के लिए 25 और हलवाई ट्रेड के लिए 150 कारीगरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोनों ट्रेड के लिए पात्र अभ्यर्थियों का चयन साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हलवाई ट्रेड के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 20 अगस्त को सुबह 11 बजे से कार्यालय जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र में आयोजित किया जाएगा। वहीं, धोबी ट्रेड के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 21 अगस्त को इसी समय और स्थान पर होगा।
अधिकारियों ने बताया कि चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की योग्यता, अनुभव और संबंधित ट्रेड में उनकी रुचि को ध्यान में रखा जाएगा। चयनित कारीगरों को प्रशिक्षण के दौरान व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए जरूरी जानकारी दी जाएगी। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से सरकार का उद्देश्य छोटे और पारंपरिक व्यवसायों को बढ़ावा देना है। कई कारीगर पीढ़ियों से अपने पारंपरिक काम से जुड़े हुए हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और संसाधनों की कमी के कारण उन्हें बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई होती है।
प्रशिक्षण और आधुनिक टूल किट मिलने से इन कारीगरों को अपने काम की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। योजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पारंपरिक कारीगरों के हुनर को संरक्षित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है। आधुनिक उपकरणों के उपयोग से कारीगर कम समय में बेहतर उत्पाद तैयार कर सकेंगे। स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कारीगरों के लिए यह योजना आर्थिक मजबूती का माध्यम बन सकती है।
सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक पात्र लोगों को इस योजना का लाभ मिले और वे अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकें। उद्योग विभाग ने इच्छुक कारीगरों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल हों। विभाग की ओर से योजना से जुड़ी अन्य जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत मिलने वाला प्रशिक्षण और सहायता पारंपरिक व्यवसायों को नई दिशा देने की कोशिश है। इससे कारीगरों को अपने कौशल को आधुनिक जरूरतों के अनुसार विकसित करने का अवसर मिलेगा।




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