कारगिल युद्ध स्मारक पर सैनिकों को दी श्रद्धांजलि और जानिए क्या कहा...

बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी में भी भारत की ओर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं है क्योंकि सीमा पर देश के बहादुर सैनिक रक्षा कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर वे नियंत्रण रेखा पार करने से नहीं हटेंगे, जिसके बारे में सैन्य बलों को पहले ही बता दिया गया है।
सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे और नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार के साथ यहां कारगिल युद्ध स्मारक का दौरा किया और 1999 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
KNO(समाचार एजेंसी-कश्मीर न्यूज ऑब्जर्वर) के अनुसार, इस अवसर पर सिंह बोले कि भारत अन्य सभी देशों का बहुत सम्मान करता है और अंतरराष्ट्रीय आचरण के लिए निर्धारित मानदंडों का भी पालन करता है, लेकिन इसकी उदारता को इसकी कमजोरी नहीं माना जा सकता है।
“नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बहुत स्पष्ट है और जरूरत पड़ने पर सीमा पार ऑपरेशन शुरू करने के लिए सैन्य बलों को खुली छूट दी है। उस समय (1999) अगर हमने एलओसी पार नहीं की तो इसका मतलब यह नहीं कि हम पार करने में सक्षम नहीं हैं। सिंह ने कहा, हम एलओसी पार कर सकते थे, हम एलओसी पार कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर भविष्य में भी एलओसी पार करेंगे।
इसके अलावा, रक्षा मंत्री ने कहा, "मैं यह दोहराना चाहूंगा कि हम एलओसी पार कर सकते थे, हम एलओसी पार कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर भविष्य में भी एलओसी पार करेंगे, मैं देशवासियों को इस बात का आश्वासन देता हूं।"
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ''मैं उन वीर सपूतों को नमन करता हूं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया. मैं उन वीर सपूतों को सलाम करता हूं जिन्होंने देश को सबसे पहले रखा और इसके लिए अपने प्राणों की आहुति देने से नहीं हिचकिचाए।”
लोगों को आश्वस्त करते हुए कि देश सुरक्षित हाथों में है, सिंह ने कहा, ''हम जानते हैं कि जब तक आप (सेना) सीमाओं पर हमारी रक्षा कर रहे हैं, कोई भी भारत की ओर आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता। सिर्फ कारगिल ही नहीं, बल्कि आजादी के बाद से आज तक कई बार आपकी सैनिकों की बहादुरी ने समय-समय पर देश को गौरवान्वित किया है।”






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