न्यायपालिका पर टिप्पणी मामले में संजय राउत और निखिल वागले पर कसे कानूनी शिकंजे, सुप्रीम कोर्ट ने थमाया नोटिस.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
नई दिल्ली की अदालत ने शिवसेना नेता और एक प्रमुख पत्रकार को बड़ी राहत न देते हुए उनके बयानों पर सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इन दोनों के खिलाफ मानहानि के दायरे में आने वाली टिप्पणियों को लेकर जवाब तलब किया है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत दी है।
यह पूरा घटनाक्रम तब गर्माया जब मुख्य न्यायाधीश की एक मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में बयानबाजी शुरू हुई। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े एक ज्ञापन को सौंपने के लिए विपक्षी नेताओं ने समय मांगा था, जिसे लंबित मामलों के संदर्भ में संवैधानिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया गया था। इसके बाद सार्वजनिक मंचों पर न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर तीखे हमले किए गए, जिनमें लंदन में खेल आयोजन के दौरान जजों की मौजूदगी जैसे विवादित दावे भी शामिल रहे।
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इस तरह के बयानों से संस्था की गरिमा प्रभावित होती है, जिन्हें नजरअंदाज करना उचित नहीं है। वहीं, पक्ष रख रहे कानूनविदों ने भी यह रेखांकित किया कि न्यायपालिका पर दबाव बनाने के उद्देश्य से दिए जाने वाले ऐसे बयान बेअसर साबित होते हैं। दूसरी ओर, विवादित बयानों से जुड़े एक पक्ष ने इसे व्यवस्था के प्रति उपजा स्वाभाविक क्षोभ बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया पर खेद भी प्रकट किया है।
इसी बीच, निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं के सिलसिले में भी अदालत ने सुनवाई की है। विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूची में अनियमिताओं और नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर दाखिल की गई याचिकाओं पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।






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