सुप्रीम कोर्ट में यह सप्ताह काफी उथल-पुथल वाला रहा, रेवड़ी कल्चर पर मप्र को दिया नोटिस.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
सुप्रीम कोर्ट में यह सप्ताह खबरों को लेकर काफी उथल-पुथल वाला रहा। एससी से लेकर लोअर कोर्ट तक के वीकली राउंड अप में इस सप्ताह कानूनी खबरों पर नजर दौड़ाएं तो सुप्रीम कोर्ट ने बिहार जाति सर्वेक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वहीं रेवड़ी कल्चर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त दिखाई दी। इधर राजस्थान और मध्य प्रदेश को इस मामले में नोटिस भेजा। शराब घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से सख्त सवाल पूछे। इस हफ्ते यानी 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक अनेक महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं। उनमें जतिगत सर्वे महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को राज्य में उसके द्वारा किए गए जाति सर्वेक्षण के आधार पर आगे निर्णय लेने से रोकने की याचिका खारिज कर दी और कहा कि किसी सरकार को नीतिगत निर्णय लेने से रोकना गलत होगा।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा कि जाति सर्वेक्षण कराने के राज्य के फैसले को बरकरार रखने वाला पटना हाई कोर्ट का फैसला विस्तृत था, इसे दी गई चुनौती पर विस्तार से सुनवाई होनी चाहिए। एक खबर यह भी थी कि सरकारी विभागों में कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों में भी आरक्षण मिलेगा। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये जानकारी दी। सरकारी अनुबंध नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण के कार्यान्वयन की कमी के बारे में चिंता जताते हुए एक जनहित याचिका में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को पहले ही आदेश पारित कर दिया गया है। ऐसे उम्मीदवारों को नीति के अनुसार अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण दिया जाएगा जो न्यूनतम 45 दिनों की होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राजनीतिक दलों को करदाताओं के खर्च पर नकदी और अन्य मुफ्त चीजें बांटने से रोकने के लिए व्यापक दिशानिर्देश देने की मांग की गई है। कोर्ट ने उनसे चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाला केस में जांच एजेंसी ईडी से कई सख्त सवाल पूछे। मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिव संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की बेंच ने मामले को 12 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या किसी नीतिगत निर्णय को प्रस्तुत तरीके से कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तर्क दिया कि नीति जानबूझकर विशिष्ट व्यक्तियों के पक्ष में तैयार की गई थी और सबूत के तौर पर व्हाट्सएप संदेशों को प्रस्तुत किया गया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन संदेशों की स्वीकार्यता पर आपत्ति व्यक्त की। पूरी कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट जांच एजेंसियों से कड़े सवाल पूछने से नहीं हिचकिचाया।






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