रायपुर में जानलेवा डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगे, विसर्जन झांकी में हो अनिवार्य 'अल्कोहल टेस्ट' व पारंपरिक वाद्य-नृत्यों को मिले बढ़ावा: मनोज सिंह ठाकुर.....
*भगवान गणेश विसर्जन झांकी में शामिल हर सदस्य की हो ब्रेथ एनालाइज़र से जांच;* *नशेड़ियों व उपद्रवियों पर कड़ा एक्शन हो*
*डीजीपी, पुलिस कमिश्नर, संभागायुक्त व कलेक्टर को भेजा *ज्ञापन; जनस्वास्थ्य, शांति व सांस्कृतिक मर्यादा की रक्षा की मांग*

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-
रायपुर :- राजधानी रायपुर में धार्मिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बजने वाले अत्यधिक तीव्र ध्वनि और कंपन पैदा करने वाले डीजे/साउंड सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा आगामी गणेश विसर्जन झांकी को नशामुक्त व सुरक्षित बनाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता, अधिवक्ता एवं पूर्व सदस्य, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल मनोज सिंह ठाकुर ने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला, संभागीय आयुक्त, कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त को विधिवत ज्ञापन प्रेषित कर कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की है।
विसर्जन झांकियों में अनिवार्य हो 'अल्कोहल टेस्ट', उपद्रवियों पर त्वरित कार्रवाई गणेश विसर्जन एवं आगामी त्योहारों की शांति व्यवस्था को लेकर मनोज सिंह ठाकुर ने महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि:
विसर्जन झांकी में सम्मिलित होने वाले प्रत्येक सदस्य व समिति कार्यकर्ता का झांकी मार्ग पर प्रवेश से पूर्व ब्रीथ एनालाइज़र मशीन से अनिवार्य अल्कोहल परीक्षण किया जाए।
प्रमुख चौराहों व संवेदनशील मार्गों पर तैनात पुलिस बल अल्कोहल डिटेक्शन मशीनों के साथ मुस्तैद रहे और संदिग्धों की तत्काल जांच करे। शराब के नशे में पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को तुरंत भीड़ से अलग कर सुरक्षित घर भेजने की व्यवस्था की जाए। यदि कोई समझाने के बाद भी अशांति फैलाए, तो उसे विसर्जन संपन्न होने तक अस्थाई डिटेंशन या थाने में सुरक्षार्थ रखा जाए ताकि किसी प्रकार का क्लेश, विवाद या अप्रिय घटना न हो।
डीजे के शोर से स्वास्थ्य पर घातक वार, पुराने मकानों को खतरा
मनोज सिंह ठाकुर ने रेखांकित किया कि अनियंत्रित डीजे की तेज धमक और कंपन से शहर के बुजुर्गों, हृदय रोगियों, गंभीर मरीजों व छोटे बच्चों का जीवन संकट में पड़ रहा है। लगातार कानफोड़ू आवाज से सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है तथा घनी आबादी वाले पुराने मोहल्लों के मकानों की दीवारों व छतों में कंपन से दरारें आने का अंदेशा बढ़ गया है। उच्च न्यायालय के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद ध्वनि प्रदूषण नियमों की अनदेखी हो रही है।
डीजे बंद कर छत्तीसगढ़िया पारंपरिक वाद्यों और नृत्यों को मिले मंच
उन्होंने मांग की कि किसी भी धर्म (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) के आयोजनों में डीजे के स्थान पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और गौरवशाली वाद्य यंत्रों—गढ़वा बाजा, मांदर, झांझ, मंजीरा, दफड़ा, ताशा, निशान, मोहरी, धुमाल, बैंड-बाजा, शहनाई, शंखनाद व नगाड़ों को अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही आयोजनों में पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुआ, करमा, ददरिया, गेड़ी, बस्तरिया नृत्य, गरबा, डांडिया व भांगड़ा जैसे समृद्ध लोक-नृत्यों को मंच मिले। इससे स्थानीय लोक-कलाकारों को रोजगार मिलेगा, संस्कृति समृद्ध होगी तथा भारी-भरकम डीजे वाहनों के कारण लगने वाले जाम से भी शहर को मुक्ति मिलेगी।





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