दुनिया पानी के बूंद बूंद के लिए तरसेगी,भारत में गहराएगा जलसंकट......

इस बात में कोई दो राय नही है की, दुनिया की एक चौथाई आबादी वर्तमान में जल संकट से परेशान है। जनसंख्या में तेजी से हो रही वृद्धि, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और अकुशल जल प्रबंधन जैसे कारकों से पानी की कमी की व्यापक समस्या पैदा हो रही है। आशंका है कि आने वाले समय में पानी की कमी के गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। यह सभी समाज और पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं को ज्यादा प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पानी की कमी वर्तमान में दुनिया भर के कई क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। वैश्विक समुदाय एक अद्वितीय जल आपातकाल का सामना कर रहा है
जिसमें दुनिया की एक चौथाई आबादी के बराबर 25 देश मौजूदा समय में वार्षिक जल तनाव (जल तनाव या जल संकट) के असाधारण ऊंचे स्तर से जूझ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर सालाना कम से कम एक महीने के लिए दुनिया की आधी आबादी के करीब 4 अरब लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह जलसंकट अगले 27-28 सालों में 2050 तक करीब 60 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसके बेहद ही गंभीर और दूरगामी परिमाण सामने आ सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार साल 2050 तक सकल घरेलू उत्पाद में 70 ट्रिलियन डॉलर (वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 31प्रतिशत) उच्च जल तनाव के संपर्क में आ जाएगा जोकि 2010 में 15 ट्रिलियन डॉलर(वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 24 प्रतिशत) से अधिक है।
हर चार साल में जारी होने वाली रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि साल 2050 तक सकल घरेलू उत्पाद के आधे से अधिक के लिए केवल 4 देश भारत, मैक्सिको, मिस्र और तुर्की इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं। रिपोर्ट से पता चला कि 25 देश, जिनमें दुनिया की एक चौथाई आबादी शामिल है, हर साल अत्यधिक गंभीर जल संकट से गुजर रही है। इसमें बहरीन, साइप्रस, कुवैत, लेबनान और ओमान पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। सूखे की छोटे अवधि काल के दौरान भी ये सभी क्षेत्र पानी की कमी की चपेट में आ सकते हैं।
सबसे अधिक जल तनाव का सामना करने वाले क्षेत्रों में मुख्य रूप से मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका हैं, जहां 83 प्रतिशत आबादी अत्यधिक उच्च जल संकट का सामना कर रही है। इसके अलावा दक्षिण एशिया की करीब 74 फीसदी आबादी का अहम हिस्सा इसी तरह की स्थितियों के संपर्क में है। रिपोर्ट लेखक सामंथा कुज्मा ने बताया कि पानी की कमी का होना दर्शाता है कि हम इस अच्छी तरह से प्रबंधित नहीं कर रहे हैं, जबकि ग्रह पर पानी सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। उनका कहना कि वह करीब 10 सालों से पानी पर काम कर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि पूरे 10 साल की कहानी करीब-करीब वही रही है। उनका कहना है कि तत्काल जल संकट से निपटने के लिए तत्काल उपाय आवश्यक हैं।






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