रायपुर-बलौदाबाजार-सारंगढ़ फोरलेन का काम सिर्फ कागजों पर, कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्रीय सड़क परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया है कि रायपुर-बलौदाबाजार-सारंगढ़ फोरलेन (एनएच-130 बी) का काम पिछले ढाई साल से सिर्फ कागजों और श्रेय लेने की राजनीति तक ही सीमित है, जबकि धरातल पर अब तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
कांग्रेस ने कहा कि जुलाई 2024 से राज्य सरकार बार-बार जनता को इस बड़ी सौगात का एहसान जता रही है, लेकिन हकीकत यह है कि निर्माण की रफ्तार कछुए से भी धीमी है। सवा दो साल का समय बीत जाने के बाद भी सरकार सर्वे, डीपीआर और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तक पूरी नहीं कर पाई है। सरकार के इन दावों और खोखले वादों से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है।
अन्य केंद्रीय योजनाओं की स्थिति भी निराशाजनक -
सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि प्रदेश में अन्य केंद्रीय योजनाओं का भी यही हाल है। उन्होंने याद दिलाया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रायपुर से राजनांदगांव होकर हैदराबाद तक नया हाईवे बनाने का वादा कर वोट मांगे थे, लेकिन चुनाव जीतने के बाद बिना किसी कारण इस परियोजना को ही निरस्त कर दिया गया। इसी तरह नया रायपुर (अटल नगर) में नए एम्स के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय ही जमीन अधिग्रहित कर केंद्र को सौंप दी गई थी, लेकिन आज तक वहां एक ईंट नहीं रखी गई है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने 10 सांसद चुनकर भेजे हैं, लेकिन जब राज्य के अधिकारों की बात आती है, तो भाजपा नेता मौन साध लेते हैं।
बजट 1500 करोड़, जारी हुए केवल 7 करोड़ -
कांग्रेस ने राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव और राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब इस परियोजना को प्रारंभिक रूप से हरी झंडी मिली थी, तब इन नेताओं ने केंद्रीय मंत्रियों का आभार जताते हुए बड़े स्तर पर इसका श्रेय लिया था। विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर जनता का पैसा बहाया गया, लेकिन आज तक इस कार्य का कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी नहीं हुआ है। वन विभाग की मंजूरी, बिजली पोल शिफ्टिंग और जमीन अधिग्रहण (3A नोटिफिकेशन) की प्रक्रियाओं में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है। 1500 करोड़ रुपये के बजट वाले इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक सिर्फ 7 करोड़ रुपये ही जारी हो पाए हैं, जो सरकार की इच्छाशक्ति की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।






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