नेपाल में आए भूकंप का असर भारत में भी महसूस किया गया...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली- शुक्रवार को नेपाल में आए भूकंप का असर भारत में भी महसूस किया गया हैं। जिससे दिल्ली और एनसीआर का इलाका भी अछूता नहीं रहा है। इसके बाद अब सवाल उठने लगा है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके लगातार क्यों महसूस होते हैं? यहां रहने वाले लोगों के दिमाग में यह सवाल बार-बार उठता है कि कहीं यहां बार-बार आने वाले झटके किसी बड़े भूकंप की आहट तो नहीं हैं? भूकंप के जानकार चेता चुके हैं कि दिल्ली-एनसीआर में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है। हालांकि ये कब आए, इसकी पुष्टि अभी नहीं की गई है। दिल्ली-एनसीआर के नीचे 100 से ज्यादा लंबी और गहरी फॉल्ट्स हैं।
इसमें से कुछ दिल्ली-हरिद्वार रिज, दिल्ली-सरगोधा रिज और ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट पर हैं। इनके साथ ही कई सक्रिय फॉल्ट्स भी इनसे जुड़ी हुई हैं। वहीं दूसरी तरफ एक सच यह भी है कि चाइना ने एक समय दावा किया था कि जानवरों के व्यवहार को देखकर भूकंप की भविष्यवाणी की जा सकती है। मगर, यह दावा भी सही साबित नहीं हुआ। वैसे भूकंप की भविष्यवाणी तीन दावों पर निर्भर करती है कि भूकंप कब आएगा? भूकंप कहां आएगा? और भूकंप कितनी तीव्रता का आएगा? इन तीनों भविष्यवाणी को लेकर कोई दावा नहीं कर सका है, इसलिए आज तक कोई भी रिसर्च सफल नहीं हुई है।
भूकंप को लेकर सीपी राजेंद्रन ने 2018 में एक स्टडी की थी। इसके मुताबिक साल 1315 और 1440 के बीच भारत के भाटपुर से लेकर नेपाल के मोहाना खोला तक 600 किलोमीटर लंबा सिस्मिक गैप बन गया था। 600-700 सालों से ये गैप शांत है, लेकिन इस पर लगातार भूकंपीय दबाव बन रहा है। हो सकता है कि ये दबाव भूकंप के तौर पर सामने आए। अगर यहां से भूकंप आता है तो 8.5 तीव्रता तक हो सकता है।
डराने वाली बात यही है कि दिल्ली में 8.5 तीव्रता का भूकंप आया तो क्या होगा, कितनी बड़ी तबाही आएगी इसका अनुमान लगाना बहुत मुश्किल नहीं है।जवाहरलाल नेहरू सेंटर ऑफ एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च में प्रोफेसर सीपी राजेंद्रन के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है। लेकिन ये कब आएगा और कितना ताकतवर होगा, ये कह पाना मुश्किल है।
वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए हमें पृथ्वी की संरचना को समझना होगा। पृथ्वी टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। इसके नीचे तरल पदार्थ लावा है और इस पर टैक्टोनिक प्लेट्स तैरती रहती हैं। कई बार ये प्लेट्स आपस में टकरा जाती हैं। बार-बार टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है। जब इससे डिस्टर्बेंस बनता है तो इसके बाद भूकंप आता है।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments