राम नाम की महिमा अपरंपार है : सुरेश शास्त्री.....

लहार क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मजिस्ट्रेट की उपाधि से सम्मानित कांकशी सरकार के दरवार में संत श्री श्री 1008 रामशरण दास जी महाराज के साकेत धाम गमन की स्मृति में श्री श्री 1008 रामदास जी महाराज दंदरौआ सरकार की अध्यक्षता में एवं मन्दिर के प्रतिनिधि बालकृष्ण दास उर्फ प्रभू जी महाराज के सानिध्य में चल रही है, चतुर्थ दिवस भागवत कथा में कथावाचक डॉ सुरेश शास्त्री ने भगवान के नाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा राम न सकहिं नाम गुण गाई स्वयं श्री राम भी नहीं बता सकेगें नाम की महिमा, शास्त्री ने बताया प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर का स्मरण करना चाहिए लेकिन सब लोग दुख मे ही सुमिरन करते हैं सुख में भूल जाते हैं,भगवान के प्रसाद का कभी अपमान नहीं करना चाहिए यदि करते हैं तो अपराध होता है देवताओ ने प्रभु की प्रसादी माला का अपमान किया परिणाम स्वरूप स्वर्ग छिन गया फिर भगवान ने समुद्र मंथन कराया अमृत देवो को पिलाया चौदह रत्न निकले जिन्हें बांट दिया। पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया भगवान अपने भक्तों की रक्षा येसे करते हैं जैसे माँ अपने बच्चो की करतीं है,वलि राजा के द्वार भगवान स्वयं वामन रुप धारण कर के गये भिक्षा मागने ओर तीनों लोक ले लिये ओर राजा की रक्षा करने लगे, सूर्य वंश मे श्री राम जी आये चन्द्र बंश में कृष्ण, राम दिन में आये कृष्ण रात्रि में राम ने महल में कृष्ण ने जेल में जन्म लिया राम जी से विपरीत चरित्र है कृष्ण का समझना कठिन है,राम मयार्दा पुरषोत्तम है कृष्ण लीला पुरषोत्तम, मंच का संचालन भागवताचार्य देवेंद्र उपाध्याय ने किया मूल पाठ विभूति कृष्ण शास्त्री ने प्रिया स्मरण करते हुए किया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।






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