पत्थलगांव का काला सच: खादी-खाकी के साये में दब रहा कानून, पॉक्सो और जमीन पर कब्जे के संगीन आरोपों पर जनता बेबस...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
जशपुर: सुशासन और कानून के राज के बड़े-बड़े दावों के बीच जशपुर जिले का पत्थलगांव इन दिनों सत्ता और रसूख के साये में चल रहे कथित समानांतर तंत्र की वजह से चर्चा में है। यहाँ पॉक्सो एक्ट, एससी/एसटी अत्याचार, मारपीट, अवैध कब्जा और वसूली जैसे गंभीर आरोप आम हो चले हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण न्याय आज भी फाइलों में कैद नजर आता है।
न्याय की आस में चार साल से भटक रहा पीड़ित परिवार -
वर्ष 2022 से जुड़े एक संवेदनशील मामले में वार्ड क्रमांक 12 के एक स्थानीय जनप्रतिनिधि पर आदिवासी नाबालिग से जुड़े अत्यंत गंभीर आरोप दर्ज हैं। कड़े कानूनों और त्वरित न्याय के प्रावधानों के बावजूद पीड़ित परिवार पिछले चार वर्षों से थानों और अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर है। आरोप है कि रसूख के बल पर मामलों को दबाने का प्रयास किया जाता है, जिससे आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठता जा रहा है।
एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रसूख की कहानी -
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि क्षेत्र में प्रभाव का दायरा एक व्यक्ति तक सीमित न होकर पूरे पारिवारिक नेटवर्क तक फैला हुआ है:
वार्ड 13: इस क्षेत्र से जुड़े एक प्रतिनिधि और उनके परिवार के सदस्यों पर लगातार गंभीर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बढ़ते खौफ के माहौल के कारण लोग खुलकर सामने आने से बचते हैं।
एल्डरमेन का विवाद: एक महिला के घर में घुसकर मारपीट करने का कथित वीडियो सामने आने और पूर्व के मामलों के बावजूद इस कुनबे की पकड़ और दबदबा प्रशासनिक गलियारों में जस का तस बना हुआ है।
करोड़ों की जमीन पर कब्जा और बेअसर प्रशासनिक तंत्र -
हाल ही में बेशकीमती जमीन पर कब्जे और अवैध सौदेबाजी का मामला भी सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री जनशिकायत हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई, इसके बावजूद विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहने की चर्चा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस करोड़ों की जमीन को ठिकाने लगाने की कोशिशें चल रही हैं, जिससे शीर्ष शिकायत निवारण तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े होते हैं।
जनता के सीधे और तीखे सवाल -
पत्थलगांव की जनता अब प्रशासन और स्थानीय नुमाइंदों से कुछ स्पष्ट जवाब चाहती है:
इतने संगीन और गंभीर मामलों में नाम सामने आने के बावजूद संरक्षण जैसी स्थिति क्यों बन जाती है ?
जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की चुप्पी क्या इन मामलों को और बढ़ावा दे रही है ?
अनगिनत शिकायतों और पुख्ता प्रमाणों के बाद भी ठोस दंडात्मक कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है ?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई कर पाता है या फिर रसूखदारों का यह दबदबा यूं ही जनता के अधिकारों को कुचलता रहेगा।






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