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तो विपक्ष को क्यों नहीं, सत्तापक्ष को चुनावी चंदे की जानकारी का हक....

Nov 3, 2023
2 min read






































ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नई दिल्ली- चुनावी बांड योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से तल्ख सवाल ‎किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा ‎कि जब सत्ता पक्ष को चंदे की जानकारी लेने का हक है तो ‎फिर ‎विपक्ष को यह हक क्यों नहीं है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सत्ताधारी दल विपक्षियों के चंदे की जानकारी ले सकते हैं।


लेकिन विपक्षी दल ये जानकारी नहीं ले सकते। केंद्र ये सुनिश्चित करेगा कि इस योजना में प्रोटेक्शन मनी या बदले में लेन- देन नहीं शामिल होगा। क्या ये कहना गलत होगा कि इस योजना से किकबैक को बढावा मिलेगा या इसे वैध ठहराया जाएगा। सीजेआई ने कहा कि हम जानते हैं कि सत्तारूढ़ दल को अधिक दान मिलता है। यह व्यवस्था का हिस्सा है और यही चलन भी है। मामले पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने केंद्र से सवाल पूछा है। सीजेआई ने कहा कि ये योजना चुनिंदा गुमनामी और चुनिंदा गोपनीयता रखती है। इसमें कोई शक नहीं कि इस योजना के पीछे सोच सराहनीय है। यह पूरी तरह से गुमनाम या गोपनीय नहीं है। यह एसबीआई के लिए गोपनीय नहीं है।


सीजेआई ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा ‎कि कानून प्रवर्तन एजेंसी के लिए यह गोपनीय नहीं है। इसलिए कोई बड़ा दानदाता कभी भी चुनावी बांड खरीदने का जोखिम नहीं उठाएगा। इसपर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि चेक से देने पर खुलासा हो जाएगा कि किस पार्टी को कितना पैसा दिया गया। उससे अन्य पार्टियां नाराज हो सकती हैं। ऐसे में कंपनियां चंदा दाता नकद ही दे देते है और सब खुश रहते हैं। सैकड़ों करोड़ रुपए नकद चंदा दे दिया जाता है। जस्टिस बीआर गवई ने पूछा फिर आयकर में छूट कैसे मिलती है चंदा दाता को? इस पर सीजेआई ने कहा कि बड़े चंदा दाता तो अपने अधिकारिक चैनल्स से छोटी रकम के बॉन्ड्स खरीदते हैं। वो अपनी गर्दन इसमें नहीं फंसाते हैं। हालांकि, इस स्कीम का मकसद नकदी लेनदेन कम करना, सभी के लिए समान अवसर मुहैया कराना और काले धन के इस्तेमाल को खत्म करना है। इससे हमें कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन उसका अनुपातिक और सटीक इस्तेमाल हो रहा है क्या? यही बहस का मुद्दा है।


मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा ‎कि इस चुनिंदा गोपनीयता के कारण, विपक्षी दल को यह नहीं पता होगा कि आपके दानदाता कौन हैं। लेकिन विपक्षी पार्टी को चंदा देने वालों का पता कम से कम जांच एजेंसियों द्वारा लगाया जा सकता है। इसलिए आपके दान पर सवाल उठाना उनके लिए नुकसानदेह है। एसजी तुषार मेहता ने कहा कि आम तौर पर राजनीति में काले धन का उपयोग को लेकर हर देश इससे जूझ रहा है। प्रत्येक देश द्वारा परिस्थितियों के आधार पर इन मुद्दों से निपटा जा रहा है। भारत भी इस समस्या से जूझ रहा है। सभी सरकारों ने अपने कार्यकाल में चुनावी प्रक्रिया से काले धन को दूर रखने का सिस्टम बनाया। साफ धन बैंकिंग सिस्टम के जरिए ही चुनावी चंदे के रूप में आए इसकी व्यवस्था की। ताकि अन अकाउंटेड मनी या अज्ञात स्रोत वाला धन चुनावी या राजनीतिक चंदे में ना आए। इसके ‎लिए कई कदम समय समय पर उठाए गए।

 
 
 

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