स्मार्ट सिटी मिशन: कागजों पर ₹1,764 करोड़ खर्च, पर धरातल पर काम अधूरा और पेनाल्टी 'शून्य'; PIL की तैयारी.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-
स्मार्ट सिटी मिशन(रायपुर व बिलासपुर): केंद्र सरकार की RTI से ₹1,764 करोड़ के कथित व्यय और जमीनी हकीकत में भारी विधिक विरोधाभास उजागर कागजों में 100% खर्च, गुणवत्ता रिपोर्ट का रिकॉर्ड नहीं, ठेकेदारों पर पेनाल्टी 'शून्य'...
केंद्र सरकार ने RTI में स्वीकाराः रायपुर के ₹453 करोड़ का 100% उपयोग दर्ज, पर सड़कों-ड्रेनेज के वास्तविक कार्य व ऑडिट रिपोर्ट का केंद्र के पास कोई रिकॉर्ड नहीं...
31 मार्च 2025 को मिशन आधिकारिक रूप से समाप्त, वर्षों की अत्यधिक देरी के बावजूद निर्माण एजेंसियों पर पेनाल्टी 'NII'...
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री को सौंपा विस्तृत ज्ञापन; कहा-'शासन शीघ्र कठोर कार्रवाई करे, जनहित में उच्च न्यायालय में PIL लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ'...

रायपुर:- पूर्व सदस्य छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MOHUA) द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दिए गए आधिकारिक पत्रांक क्रमांक K-15015/1/RTI/2026-SC 1/9210416 (दिनांक 14.09.2026) के आधार पर रायपुर एवं बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन में हुए अभूतपूर्व वित्तीय कदाचार, प्रशासनिक लापरवाही और गंभीर विधिक विरोधाभासों का दस्तावेजी पर्दाफाश किया। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने प्रेस के समक्ष आधिकारिक दस्तावेज़ एवं समाचार पत्रों के सचित्र प्रमाण प्रस्तुत करते हुए निम्नलिखित प्रमुख तथ्य रेखांकित किएः-

1) ₹1,764 करोड़ के कथित व्यय पर गंभीर सवाल, धरातल पर योजनाएं अधूरीः
केंद्र सरकार ने आरटीआई उत्तर में आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि रायपुर को जारी ₹453 करोड़ की केंद्रीय राशि का 100% उपयोग हो चुका है। केंद्र एवं राज्य के 50:50 मैचिंग शेयर नियम के तहत रायपुर में कुल ₹906 करोड़ तथा बिलासपुर में कुल 1858 करोड़ (व्ययः ₹822 करोड़) यानी दोनों शहरों में कुल ₹1,764 करोड़ की भारी-भरकम सार्वजनिक राशि का व्यय कागजों में दर्शा दिया गया है। हैरतअंगेज पहलू यह है कि जब आरटीआई में इन सड़कों, पाइपलाइनों और ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्बर की वास्तविक भौतिक स्थिति (Physical Completion) और धर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट मांगी गई, तो केंद्रीय मंत्रालय ने हाथ खड़े करते हुए लिखित उत्तर दिया कि इसका कोई रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि यह स्थिति स्वतः सिद्ध करती है कि बिना किसी निष्पक्ष तकनीकी स्थलीय परीक्षण और थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट के केवल बंद कमरों में यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स (UC) जारी कर 100% भुगतान कर दिया गया।

2) वर्षों का विलंब, जनता त्रस्त, समाचार पत्रों में उजागर सचित्र प्रमाणः
दस्तावेज़ों के अनुसार स्मार्ट सिटी मिशन आधिकारिक रूप से 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत का सचित्र खुलासा प्रमुख समाचार पत्रों ने लगातार अपनी विस्तृत रिपोर्टों में किया है: शारदा चौक से तात्यापारा मार्ग चौड़ीकरण (रायपुर): 2018-19 का प्रोजेक्ट, जिसकी अनुबंधीय समय-सीमा 2021 में समाप्त हो चुकी थी, लेकिन 2025 में मिशन खत्म होने के बाद 2026 में भी कार्य अधूरा है। दैनिक भास्कर (दिनांक 14 जून 2023) एवं पत्रिका (दिनांक 22 सितंबर 2024) ने सचित्र उजागर किया कि 6 वर्षों में एक इंच चौड़ीकरण नहीं हुआ और नागरिक धूल, गड्डों व जाम से त्रस्त रहे।
24x7 प्रेशराइज्ड वाटर सप्लाई स्कीम: मोतीबाग कमांड एरिया (रमण मंदिर वार्ड, गंज, बैरन बाजार, पुरानी बस्ती) का अनुबंध वर्ष 2020-21 में 18 माह (मध्य 2022 समाप्ति) हेतु हुआ था। नईदुनिया (दिनांक 28 मई 2023) एवं दैनिक भास्कर (दिनांक 11 नवंबर 2023) ने प्रमुखता से सचित्र रिपोर्ट प्रकाशित की कि सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं और जनता गंदा व दूषित पानी पीने को विवश रही।
कुशालपुर-संतोषी नगर-सुंदर नगर ड्रेनेज नेटवर्क: अनुबंध 2021-22 में मानसून पूर्व कार्य पूर्ण करने हेतु हुआ था, किंतु कार्य वर्षों लटकने से प्रतिवर्ष बस्तियों के जलमग्न होने का सचित्र प्रमाण दैनिक भास्कर (दिनांक 18 जुलाई 2023) एवं पत्रिका (दिनांक 08 अगस्त 2024) द्वारा उजागर किया गया।
बिलासपुर मंगला एसटीपी एवं रिवरफ्रंट: 2021-22 का 18 माह का अनुबंध 2023 में समाप्त होने के बावजूद कार्य अपूर्ण रहने का प्रमाण पत्रिका (दिनांक 18 अक्टूबर 2024) एवं दैनिक भास्कर (दिनांक 16 सितंबर 2023) ने प्रकाशित किया, जिसे स्वयं नगर निगम ने उच्च न्यायालय में शपथ-पत्र देकर स्वीकार किया।
3) वर्षों की अत्यधिक देरी के बावजूद ठेकेदारों पर पेनाल्टी "शून्य" (Nil):
अनुबंध की अनिवार्य शर्तों (Liquidated Damages) के तहत ऐसी कार्य-विलंब करने वाली डिफाल्टर कंपनियों पर करोड़ों रुपये की पेनाल्टी लगाई जानी चाहिए थी। परंतु भारत सरकार के आरटीआई उत्तर के बिंदु क्रमांक 4 में आधिकारिक रूप से लिखा गया है कि निर्माण एजेंसियों को जारी नोटिस या पेनाल्टी का आंकड़ा 'NIL' (शून्य) है। यह सीधे तौर पर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स (PMC), निर्माण एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के मध्य गंभीर सांठगांठ एवं जनता के पैसे के प्रति घोर उपेक्षा को दर्शाता है
मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित, हाई कोर्ट में PIL लगाने की प्रक्रिया प्रारंभः
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि इस संपूर्ण प्रकरण पर उन्होंने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री (नगरीय प्रशासन) एवं मुख्य सचिव को विस्तृत विधिक ज्ञापन सौंपकर मांग की हैः-
उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा EOW/ACB से संपूर्ण ₹1,764 करोड़ के खर्च और बिना ऑडिट जारी भुगतानों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अनुबंधीय नियमों का खुला उत्तंघन कर पेनाल्टी शून्य रखने वाले तत्कालीन अधिकारियों एवं डिफाल्टर ठेकेदारों पर तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर दाण्डिक कार्रवाई की जाए।
दोनों शहरों के सभी प्रोजेक्ट्स की थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट अविलंब सार्वजनिक पटल पर रखी जाए। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने दो-टूक कहा कि शासन से शीघ्र कठोर विधिक कार्रवाई अपेक्षित है। साथ ही पब्लिक हित एवं करदाताओं की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा हेतु हमने इन प्रमाणिक दस्तावेज़ों के आधार पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की विधिक प्रक्रिया विधिवत प्रारंभ कर दी है।






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