हिंडोला महोत्सव में छाया तिरंगा, मध्यांचल के पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर हिंडोला महोत्सव की धूम....

भगवान कृष्ण की माधुर्य लीला का प्रतीक है हिंडोला महोत्सव-कैलाश मंथन
मध्यांचल के पुष्टि भक्ति केंद्रों पर इन दिनों श्रावण मास के तहत एक माह तक चलने वाले हिंडोला महोत्सव की धूम है। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद के प्रमुख प्रवक्ता कैलाश मंथन ने बताया कि श्रावण की एकम से प्रारंभ हुए हिंडोला महोत्सव का समापन दोलोत्सव 3 सितम्बर को होगा। हिंडोला महोत्सव में तिरंगा छाया है। तिरंगे से बने हिंडोलों में ठाकुर जी को झुलाया जा रहा है। अंचल के करीब 250 ग्रामों सहित शहरी क्षेत्र के सत्संग मंडलों एवं श्रीनाथ जी के मंदिरों एवं निजी गृहों में श्रावण मास में भगवान श्रीकृष्ण को हिंडोला में झुलाने की प्राचीन परंपरा है। इस अवसर पर बरखा का राग मल्हार गाकर श्री ठाकुर जी एवं राधारानी की माधुर्य रस की लीलाओं का स्मरण किया जाता है।
पुष्टिमार्गीय परिषद के जिलाध्यक्ष कैलाश मंथन के मुताबिक जिले के करीब 150 ग्रामों में स्थित मंडलियों एवं प्रमुख भक्ति केंद्रों गुना शहर के श्रीनाथ जी मंदिर, परवाह, बने, ऊमरी, भिंडरा, रतनपुरा, लालोनी, कालोनी, मगरोडा, झागर, बमोरी, फतेहगढ़ सहित क्षेत्रीय सत्संग मंडलों में इन दिनों बरसाता राग मल्हार गुंजित हो रहा है। हिंडोरे भाई झूलत लाल बिहारी, संग झूले वृषभान नंदिनी प्राणन हूते प्यारी। मंगला दर्शन से शयन पर्यन्त मल्हार राग में ठाकुर जी की भक्ति में लीन भक्तों का आनंद देखने लायक होता है। पुष्टिमार्ग में अष्टसखा सूरदास, कुंभनदास, परमानंद दास, कृष्णदास, छीतस्वामी, नंददास, चर्तुभुजदास के पदों का गायन होता है। कैलाश मंथन के मुताबिक यह 3 सितम्बर तक जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि श्रावण मास में बमोरी अंचल में वृजधाम जैसा नजारा रहता है। सैकड़ों वैष्णव परिवारों में हिंडोला महोत्सव बड़े उत्साह से मनाया जाता है। बमोरी अंचल में करीब एक लाख से अधिक वैष्णव भगवान कृष्ण की भक्ति में डूबकर अपनी श्रद्धा जाहिर करते हैं।






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