सर्व आदि दल, राष्ट्रीय राजनीतिक पंजीकृत पार्टी है, चुनाव चिन्ह आवंटित हो जाएगा....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-
रायपुर-अगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 36 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ शासन संविधान का पालन नहीं कर रही है। पंथ-निर्पेक्ष (सेक्युलर) मान्यताएं समाप्त हो चुकी है। संविधान की रक्षा, मूलनिवासीयो की समता, जातिगत जनगणना के आधार पर एस.टी. एस.सी. ओबीसी की हिस्सेदारी भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों, जल जंगल जमीन के अधिकारो की रक्षा एवं संविधान की रक्षा पाटी के मुख्य उद्देश्य है।

सरकारे समाज को आपस में लड़वा रही है। कब्रिस्तान के वायदे को पूरा नहीं किया। अल्पसंख्यक आयोग में ईसाई समाज का सदस्य नहीं बना के समाज को अपमानित किया है। शव सड़को पर फेंकना, खड़ी फसल और घरों की लूट, धर्मस्थलों को जलाने, समाजिक बहिष्कार धर्म-गुरुओं की सरे आम हत्याओं में सरकार का मूक समर्थन रहा है। एफआईआर लिखा ही नहीं गय या लीपा-पोती की गई है। कांग्रेस के केबिनेट राजस्व मंत्री के नाक के नीचे कोरबा में ईसाई समाज की एकड़ सैकड़ों करोड़ की जमीन को हड़प लिया गया। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही चर्च पर तीन बार खूनी हमले हुए और एफआईआर नहीं लिखी गई, समाज को कोर्ट जाना पडा हैं। विधायक का बयान था कि जो शीतला माता को नहीं पूजते उनके जमीन के अधिकार वापस की जाए।
कांग्रेस पार्टी का खण्डन नही आने से, ईसाई समाज मानता है कि संविधान अनुपालन धर्म-निर्पेक्षता अब कांग्रेस की पार्टी लाइन नहीं रह गई है। इन्हीं कारणों से तीसरे मोर्चे का गठन सर्व आदि दल समाजिक हितों की रक्षा करेगी। छत्तीसगढ़ में ईसाई की कुल जनसांख्यकी करीब लाख है। उप-वर्ग विभाजन में रोमन कैथोलिक चर्च 2.25, प्रोटेस्टेंट चर्च 1.25 और अपरिवर्तित (जिन्होंने धर्मपरिवर्तन की घोषणा नहीं की है, पर ईसाई विचार धारा अपना लिया है) करीब 9 लाख समय-समय पर मोहन भागवत जी और भाजपा ने 15% होने का अनुमान लगाया है। बस्तर सरगुजा क्षेत्र की 6-6 सीटों पर ईसाई समाज के वोटर 50,000 से 15,000 के बीच में है। इलाकों की हर सीट पर 3,000 से 10,000 ईसाई समाज के वोटर हैं। सर्व आदी दल बस्तर क्षेत्र सरगुजा क्षेत्र में 14 और मैदानी इलाकों की 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगा। बस्तर सरगुजा के 6, तथा महासमुंद और कोरबा सीटों के प्रत्याशीयों के नाम तय हो चुके हैं। पार्टी से जूझ रही है। समाजिक समर्थन से समस्या के निराकरण की उम्मीद है। जनादेश और अपनी अनुसार मैदानी क्षेत्र की हर सीट पर प्रत्याशी उतारे जायेंगे।






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