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शुरू हुए अनुष्ठान, अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा.....

Jan 16, 2024
2 min read



























ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

अयोध्‍या - अयोध्‍या राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्‍ठा 22 जनवरी को होने वाली है। इसके लिए मंगलवार को प्रायश्चित पूजा से अनुष्‍ठानों की शुरुआत की गई। राम मंदिर पहुंचे पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्‍चार के साथ अनुष्‍ठानों की शुरुआत की। सबसे पहले प्रायश्चित और कर्म कुटी पूजा की जा रही है। इस पूजा के माध्‍यम से रामलला से माफी मांगी जाती है। माना जाता है कि रामलला की प्रतिमा बनाने में छेनी और हथौड़े के इस्‍तेमाल के चलते उन्‍हें चोट पहुंची होगी। इसकी माफी प्रायश्चित और कर्म कुटी पूजा के जरिए मांगी जाती है। अयोध्‍या में रामलला प्राण प्रतिष्‍ठा की तैयारियां जोरशोर से जारी हैं। राममंदिर गर्भ गृह को पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का मुख्य यजमान बनाया गया है। मुख्य यजमान का प्राश्यचित कर्म मंगलवार से शुरू हो गया।


मुख्य यजमान का दस विधि स्नान होगा। उन्हें सर्व प्रथम गो मूत्र से स्नान कराया जाएगा। इसके बाद क्रमश: गोमय, गोदुग्ध, गोदधि, गोघृत, कुशोदक, भस्म, मृत्तिका (मिट्टी), मधु (शहद) से स्नान कराने के बाद पवित्र जल से स्नान कराया जाएगा। साथ ही साथ प्रायश्चित का अंगभूत हवन होता रहेगा। हवन की पूर्णता के बाद वह पंचगव्य का प्राशन करेंगे। तब वह प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के लिए योग्य होंगे। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के मुख्य आचार्य पं. लक्ष्मीकांत दीक्षित ने बताया कि श्रीरामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान का श्रीगणेश 17 जनवरी को यज्ञ मंडप के 16 स्तंभों और चारों द्वारों के पूजन से होगा। इस विधान की पूर्णता के बाद ही आगे के विधान आरंभ किए जाएंगे। आचार्य दीक्षित ने बताया कि 16 स्तंभ 16 देवताओं के प्रतीक हैं। इनमें गणेश, विश्वकर्मा, बह्मा, वरुण, अष्टवसु, सोम, वायु देवता को सफेद वस्त्र जबकि सूर्य व विष्णु को लाल वस्त्र, यमराज-नागराज, शिव, अनंत देवता को काले और कुबेर, इंद्र और बृहस्पति को पीले वस्त्रों में निरूपित किया जाएगा।

मंडप के चार द्वार, चार वेदों और उन द्वार के दो-दो द्वारपाल चारों वेदों की दो-दो शाखाओं के प्रतिनिधि माने गए हैं। पूर्व दिशा ऋग् वेद, दक्षिण यजुर्वेद, पश्चिम दिशा सामवेद और उत्तर दिशा अथर्व वेद की प्रतीक हैं। इनकी विधिवत पूजा के बाद चार वेदियों की पूजा होगी। ये चार वेदियां-वास्तु वेदी, योगिनी वेदी, क्षेत्रपाल वेदी ओर भैरव वेदी कही जाती हैं। इन चार के मध्य प्रधान वेदी होगी। इसे पंचांग वेदी कहा जाता है। पहले दिन प्रधान वेदी के समक्ष पांच प्रकार के पूजन होंगे। इनमें गणेश अंबिका, वरुण, षोडशोपचार व सप्तधृत मात्रिका पूजन एवं नांदी श्राद्ध होगा। इसके बाद प्रधान वेदी पर भगवान राम की मूर्ति रखी जाएगी जिसकी पूजा नित्य होगी। राम मूर्ति की पूजा के बाद प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान शुरू होंगे। भगवान का कर्म कुटीर किया जाएगा। आगे के दिनों में प्राण प्रतिष्ठा होने तक प्रधान वेदी के समक्ष नांदी श्राद्ध को छोड़ कर शेष चार पूजन होंगे। पांचों वेदियों की पूजा के बाद शिल्पी प्रधान विग्रह को मुख्य आचार्य को सौंप देंगे। इसके बाद आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित, वेदमूर्ति पं. गणेश्वर शास्त्री, पं. गजानन ज्योतकर, पं.जयराम दीक्षित और पं. सुनील दीक्षित मुख्य विग्रह का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण में सर्वकुशल पाए जाने के बाद विग्रह के संस्कार होंगे।

 
 
 

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