विकसित भारत 2047 के सपन को उड़ान देगा चावल उद्योग: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली: देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को धरातल पर उतारने में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर और धान-चावल उद्योग की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होगी। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की पकड़ को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विभिन्न राष्ट्रों के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को बेहद जरूरी बताया है।
राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में शुरू हुई 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026' (BIRC) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह बात कही। यह प्रतिष्ठित तीन दिवसीय सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक चल रहा है, जिसमें दुनिया भर के चावल कारोबारी, निर्यातक, आयातक और नीति निर्माता एक मंच पर जुटे हैं।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगी भारत की धाक
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब हम साल 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखने का संकल्प लेते हैं, तो कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का दायित्व अपने आप कई गुना बढ़ जाता है। भारत के पास बंपर कृषि उपज के साथ-साथ इसे प्रोसेस कर विदेशों तक भेजने की अपार क्षमता है। जरूरत इस बात की है कि वैश्विक बाजार की आधुनिक माँग के अनुसार भारतीय उद्योग खुद को ढालें।
FTA (मुक्त व्यापार समझौतों) से खुलेंगे नए रास्ते -
निर्यात को पंख देने के लिए विभिन्न देशों के साथ होने वाले व्यापारिक करारों की सराहना करते हुए पासवान ने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तैयार होंगे। भारत न केवल अपनी आबादी का पेट भरने में सक्षम है, बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य जरूरतों को पूरा करने का दम भी रखता है।
120 से अधिक देशों की मौजूदगी और किसानों को लाभ -
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के बैनर तले आयोजित इस महासम्मेलन में 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और करीब 30 हजार से ज्यादा डेलीगेट्स के शामिल होने का अनुमान है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मॉडर्न टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना, पर्यावरण के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना और सीमापार व्यापार को आसान बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की पहुँच बढ़ेगी, तो इसका सीधा फायदा देश के किसानों, राइस मिल मालिकों और छोटे-बड़े व्यापारियों को मिलेगा। वर्तमान में भारत का चावल 170 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है, और इस तरह के आयोजन इस आंकड़े को और ऊँचाइयों पर ले जाने का काम करेंगे।






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