सन-साईन केटरर्स प्रायवेट लिमिटेड के अधीन कार्य करने वाले सैकड़ों वेन्डरों के व्यवस्थापन, मूलभूत सुविधाओं एवं रोजगार के संबंध में...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-
स्टेशन रायपुर में विगत सन् 1992 से खान-पान सेवा के तहत सन-साईन केटरर्स प्रायवेट लिमिटेड के अधीन कार्य करने वाले सैकड़ों वेन्डरों के व्यवस्थापन, मूलभूत सुविधाओं एवं रोजगार के संबंध में।
मान्यवर, जैसा कि आपको ज्ञात हो कि रेल्वे स्टेशन रायपुर में खान-पान सेवा का कार्य रेल्वे विभाग के द्वारा सन-साईन केटरर्स प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा संचालित करवाया जा रहा है।
सन-साइन केटरर्स प्राइवेट लिमिटे के अधीन लगभग 100 पेन्डर खान-पान सवः का कार्य विगत सन् 1992 से निष्ठापूर्वक कर रहे हैं ।
मान्यवर, रेल्वे प्रशासन के द्वारा खान-पान ठेकेदार से उक्त कार्य के एवज में प्रतिमाह लाइसेन्स फीस ली जाती है, ठेकेदार द्वारा समव पर लाइसेंस फीस जमा नहीं करने के कारण से कई बार कार्यरत वेन्डरों का रोजगार प्रभावित हो चुका है ।
लाइसेन्स फीस व बिजली बिल समय पर ठेकेदार के द्वारा जमा नहीं करने के कारण पूर्व में कई बार ऐसी स्थिति निर्मित हो चुकी है। हमारी संस्था के द्वारा पूर्व में कई बार पत्र के माध्यम से रेल विभाग के आला अधिकारियों को बेन्डरों को होने वाली तकलीफों के विषय में अवगत कराया जा चुका है। परन्तु किसी भी अधिकारी या विभाग की ओर से उक्त ठेकेदार के विरूद्ध आज तक किसी प्रकार की जांच कार्यवाही नहीं की गई है।

मान्यवर, रेल्वे प्रशासन जबकि मुख्रा नियोक्ता है बावजूद उसके वर्षों से कार्य करने वाले वेन्डरों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
मान्यवर, अभी वर्तमान में रेल्वे विभाग की ओर से नया फमान जारी कर निर्धारित लाइसेंस फीस के साथ 18 प्रतिशत वस्तुसेक कर भी लगाया गया है, जिसे ठेकेदार के द्वारा आज तक जमा नहीं कराया गया है, राशि जो नहीं करने के कारण रेल्वे स्टेसन में संचालितफल ट्राली व पूड़ी ट्राली पूरी तरह से बंद हैं, इससे उक्त ट्रालियों में कार्य करने कुल 20 वेण्डर पूरी तरह से बेरोजगार हो गये हैं, उनके समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है ।

मान्यवर, आपको ज्ञात हो कि सन-साइन केटरर्स प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा सन् 2017 से आज तक वस्तु सेवा कर का भुगतान नहीं किया गया है, बिना जी.एस.टी. नं, के रेल्वे स्टेशन रायपुर में बड़े पैमाने में खान-पान सेवा का कार्य किया जा रहा है। आज तक किसी रेल्वे अधिकारी या किसी जी.एस.टी. विभाग के अधिकारी के द्वारा उक्त ठेकदार के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई जांच या कार्यवाही नहीं की गई। आज अचानक 2017 के बाद रेल्वे प्रशासन कुंभकरणी नींद से जागा और ठेकेदार से वस्तु सेवा कर सहित लाइसेंस फीस की मांग की गई ।
जी.एस.टी. विभाग और रेल्वे विभाग की ओर से 2017 से किसी प्रकार की जी.एस.टी. की वसूली नहीं करना संदेहास्पद प्रतीत होता है, रेल्वे स्टेशन रायपुर में जो ए- ग्रेट का स्टेशन है, रेल्वे का डिविजन कार्यालय है, ऐसे स्टेशन में खुलेआम बेधड़क बिना जी.एस.टी. के कार्य किया जाना बिना मिलीभगत के संभव नहीं है ।
मान्यवर, हमें ऐसा प्रतीत होता है कि रेल्वे विभाग और जी.एस.टी. विभाग दोनों की मिलीभगत से रेल्वे स्टेशन रायपुर में बड़े पैमाने में खान-पान सेवा का कार्य किया जा रहा है इसकी जांच किया जाना न्याय हित में आवश्यक है ।
मान्यवर, दोनों विभाग की गल्तियों का खामियाजा हम वेन्डरों को भुगताना पड़ रहा है, दोनों विभाग की भ्रष्ट कार्यप्रणाली का शिकार हम मजदूर हो रहे हैं ।

मान्यवर, हमारी संस्था के द्वारा जबकि पूर्व में अनेकों बार इस संबंध में रेल्वे प्रशासन के तमाम आला अधिकारीयों सहित रेल मंत्री को भी पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है, परन्तु समस्या आज भी जस की तस है ।
मान्यवर, हमारी संस्था आपके माध्यम से रेल्वे के तमाम आला अधिकारियों से यह माग करती है कि वर्षों से कार्य करने वाले वेन्डरों के हितों को ध्यान में रखते हुये वेन्डरों के उचित व्यवस्थापन की व्यवस्था की जावे जिससे वेन्डरों का रोजगार प्रभावित न हो सके ।
मान्यवर, यह समस्या केवल इसी माह की नहीं है यह प्रतिमाह की समस्या है, ठेकेदार समय पर पैसे जमा नहीं कर पाता है, रेल्वे दुकानें बंद करवा देता है, पूर्व में कोरोना काल में ऐसी नौबत आ चुकी है। वेन्डरगण दो वर्ष तक बेरोजगार हो गये थे। हमारी संस्था के द्वारा लंबे संघर्ष के पश्चात बमुश्किल कार्य मिल पाया है।
मान्यवर, यह एक गंभीर सोचनीय विषय है कि जी.एस.टी. विभाग की और उक्त फर्म का जी.एस.टी.नम्बर, नवम्बर 2017 में निरस्त कर दिया है उसके बावजूद भी उक्त ठेकेदार बेखौफ होकर के कार्य कर रहा है, यह बिना सांठ-गांठ केसंभव नहीं है, इसी प्रकार से रेल्वे विभाग भी नियमानुसार बिना जी.एस.टी. नंबर के ठेका प्रदान नहीं करता है, ऐसे में उक्त ठेकेदार बिना जी.एस.टी. नंबर के विगत सन् 2017 से कार्य कर रहा है। रेल्वे के अधिकारियों एवं जी.एस.टी. विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद प्रतीत होती है। दोनों विभाग के अधिकारियों के मध्य किसी प्रकार की कोई सांठ-गांठ से इंकारनहीं किया जा सकता ।
हमारी संस्था इस पत्र वार्ता के माध्यमसे रेल्वे के तमाम आला अधिकारी से यह माग करती है कि उक्त ठेकेदार के विरूद्ध जांच कर शीघ्र ही उचित कार्यवाही करते हुये वर्षों से कार्यरत वेन्डरों का व्यवस्थापन सुनिश्चित किया जावे। यदि ठेकेदार समय पर लाइसेंस फीस, बिजली बिल इत्यादि का भुगतान करने में असमर्थ है तो ऐसी स्थिति में रेल्वे स्टेशन की खान- पान सेवा का कार्य हमारी संस्था को सौंपा जावे जिससे हम वेन्डरों की रोजगार की समस्या हल हो जायेगी ।






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