150 साल पुराने जर्जर भवन का हिस्सा गिरा, बाल-बाल बचे व्यापारी और राहगीर...
- ANIS LALA DANI

- 2 days ago
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ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
आगरा :- आगरा शहर के छत्ता थाना क्षेत्र के पुराने बेलनगंज बाजार में शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां 150 वर्ष से अधिक पुराने जर्जर भवन का एक हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। घटना के समय भवन के भूतल पर संचालित हार्डवेयर की दुकान में व्यापारी पिता-पुत्र समेत कई लोग मौजूद थे। भवन का हिस्सा गिरने की आवाज सुनते ही दुकान में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और सभी तत्काल बाहर निकल आए। गनीमत रही कि हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
घटना के बाद आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और एहतियातन कुछ समय के लिए घटनास्थल के आसपास वाहनों की आवाजाही रोक दी। पुलिस ने लोगों को जर्जर भवन के आसपास जाने से भी रोका, ताकि किसी अन्य हिस्से के गिरने से दुर्घटना न हो। शाम करीब साढ़े चार बजे हुआ हादसा स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे हुई। पुराने बेलनगंज बाजार में स्थित यह मकान संदीप जैन और उनके भाइयों का बताया जा रहा है। यह भवन 150 वर्ष से अधिक पुराना है और लंबे समय से इसकी हालत जर्जर बनी हुई थी।
संदीप जैन और उनके भाई वर्तमान में मकराना शहर में रहते हैं। भवन का इस्तेमाल अब मुख्य रूप से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसके भूतल पर गिरीश गर्ग की हार्डवेयर की दुकान संचालित होती है। शुक्रवार शाम दुकान पर सामान्य रूप से काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक भवन के जर्जर हिस्से में हलचल हुई और उसका एक हिस्सा नीचे आ गिरा। मलबा गिरते ही दुकान में मौजूद लोगों ने बाहर की ओर भागकर अपनी जान बचाई।
पिता-पुत्र समेत अन्य लोग दुकान में थे मौजूदहादसे के समय हार्डवेयर की दुकान में व्यापारी पिता-पुत्र समेत अन्य लोग मौजूद बताए गए हैं। अचानक भवन का हिस्सा गिरने से कुछ समय के लिए मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आसपास के दुकानदार भी अपनी दुकानों से बाहर निकल आए। लोगों ने तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद घटनास्थल को सुरक्षित करने का प्रयास शुरू किया गया। मलबे और भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए लोगों को उसके आसपास जाने से रोका गया।
प्रारंभिक तौर पर किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है। हालांकि, बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में जर्जर भवन का हिस्सा गिरना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। 15 साल पहले नगर निगम ने घोषित किया था जर्जर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नगर निगम इस भवन को करीब 15 वर्ष पहले ही जर्जर घोषित कर चुका था। इसके बावजूद भवन का भूतल अब भी व्यावसायिक उपयोग में था। स्थानीय लोगों के अनुसार, भवन की हालत लंबे समय से खराब थी। इसके प्रथम तल का एक हिस्सा करीब 10 वर्ष पहले ही गिर चुका था। इसके बाद भी भवन का बचा हुआ हिस्सा खड़ा रहा और भूतल पर दुकान संचालित होती रही। शुक्रवार को फिर से भवन का एक हिस्सा गिरने के बाद नगर निगम की ओर से जर्जर भवनों को लेकर बरती जा रही सावधानियों और उनकी निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।
पहले भी गिर चुका है प्रथम तल का हिस्सा स्थानीय लोगों के मुताबिक, भवन के प्रथम तल का एक हिस्सा लगभग एक दशक पहले गिर गया था। उस घटना के बाद भी भवन के बाकी हिस्से को पूरी तरह हटाया नहीं गया। पुराने शहर के कई इलाकों में वर्षों पुराने भवन आज भी मौजूद हैं। इनमें से कुछ इमारतों की संरचनात्मक स्थिति बेहद खराब है। ऐसे भवन बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में राहगीरों तथा दुकानदारों के लिए खतरा बने हुए हैं। बेलनगंज की घटना ने एक बार फिर इस समस्या को सामने ला दिया है कि जर्जर घोषित किए गए भवनों के संबंध में प्रशासन को समय रहते प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। पुलिस ने कुछ देर रोका यातायात घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर कुछ देर के लिए वाहनों की आवाजाही रोक दी। पुलिस की कोशिश थी कि मलबा गिरने वाले हिस्से के आसपास भीड़ न जमा हो और किसी अन्य हिस्से के गिरने की स्थिति में कोई व्यक्ति इसकी चपेट में न आए।
बेलनगंज बाजार में हादसे की जानकारी तेजी से फैलने के बाद आसपास के लोग भी घटनास्थल पर पहुंचने लगे। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए कहा। स्थिति सामान्य होने के बाद यातायात को धीरे-धीरे बहाल किया गया। हालांकि, भवन की स्थिति को देखते हुए आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों में अभी भी चिंता बनी हुई है। जर्जर भवनों की सुरक्षा जांच की जरूरत शहर के पुराने इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे मकान हैं, जो कई दशक या एक सदी से भी अधिक पुराने हैं। इनमें से कई भवनों का निर्माण उस दौर में हुआ था, जब वर्तमान समय जैसी यातायात और आबादी की स्थिति नहीं थी। समय के साथ इन इमारतों की संरचना कमजोर हुई है। बारिश, नमी, रखरखाव की कमी और लगातार बदलती परिस्थितियों के कारण ऐसे भवनों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
बेलनगंज की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर निगम को ऐसे सभी भवनों की दोबारा जांच करानी चाहिए, जिन्हें पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है। खासकर बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित जर्जर इमारतों को लेकर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। हादसे ने टाला बड़ा नुकसान की घटना में सबसे बड़ी राहत यह रही कि भवन का हिस्सा गिरने के समय कोई व्यक्ति उसकी चपेट में नहीं आया। दुकान में मौजूद लोगों के समय रहते बाहर निकल जाने से बड़ा हादसा टल गया।
हालांकि, जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह व्यस्त बाजार क्षेत्र है। अगर भवन का हिस्सा सड़क की ओर गिरता या घटना के समय वहां राहगीरों की भीड़ होती, तो नुकसान काफी अधिक हो सकता था। फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली है। नगर निगम द्वारा पहले से जर्जर घोषित इस भवन के शेष हिस्से को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर स्थानीय लोगों की नजर है। घटना ने शहर में मौजूद पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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