जिस की जितनी आबादी है, उसे उसी के अनुसार अधिकार मिले - हेमंत सोरन....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
झारखंड सरकार भी जातीय जनगणना के मामले में बिहार की तर्ज पर चलना चाहती है। राज्य के सीएम हेमंत सोरन ने कहा कि जिस वर्ग की जितनी आबादी है, उसे उसी के अनुसार अधिकार मिलने चाहिए। अब यदि यहां जातीय जनगणना बहाल की जाती है तो अब उतना समय नहीं कि जनगणना करवाई जा सके। इसलिए राज्य की मौजूदा परिस्थितियों में फिलहाल इस पर फैसला लिए जाने के आसार बेहद कम हैं। वैसे यह मुद्दा 2024 में संभावित लोकसभा और इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान सियासी फिजां में फुटबॉल की तरह उछलता रहेगा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरन का कहना है कि वह इस बात के हिमायती हैं कि जिस समूह की जितनी आबादी है, उसे उसी के अनुसार अधिकार मिलना चाहिए। झारखंड के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल तीनों पार्टियां झामुमो, कांग्रेस और राजद इसकी पक्षधर हैं। राज्य में एनडीए गठबंधन में शामिल आजसू पार्टी भी जातीय जनगणना की मांग उठा रही है।
राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा फिलहाल इस मुद्दे पर चुप है। सीएम हेमंत सोरेन कहा कहना है कि जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर दो साल पहले ही राज्य में सभी दलों की सहमति बनी थी। इसके बाद सर्वदलीय शिष्टमंडल के सदस्यों ने सितंबर 2021 में दिल्ली जाकर इससे संबंधित मांग पत्र गृह मंत्री को सौंपा था। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार की ओर से इस पर पहल हो। पत्र में कहा गया था कि संविधान में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के विकास के लिए विशेष सुविधा और आरक्षण की व्यवस्था की गई है। आजादी के बाद से आज तक की कराई गई जनगणना में जातिगत आंकड़े नहीं रहने से विशेषकर पिछड़े वर्ग के लोगों को विशेष सुविधाएं पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में यदि अब जातिगत जनगणना नहीं कराई जाएगी तो पिछड़ी-अति पिछड़ी जातियों की शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का ना तो सही आकलन हो सकेगा, ना ही उनकी बेहतरी तथा उत्थान संबंधित समुचित नीति निर्धारण हो पाएगा।
झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है कि हमारे शीर्ष नेता राहुल गांधी स्पष्ट कर चुके हैं कि विभिन्न जातियों को उनकी जनसंख्या के आधार पर आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। पार्टी जातीय गणना के पक्ष में है। अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि केंद्र सरकार जानबूझकर इस मुद्दे से पीछे हट रही है ताकि देश में पिछड़ों को इसका लाभ नहीं मिल सके। राज्य में कांग्रेस विधायक दल के नेता और ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम बिहार सरकार की पहल को सराहनीय बताते हुए कहते हैं, जब केंद्र सरकार इसे लागू नहीं कर रही है, तो देश की राज्य सरकारों को अपने बूते गणना करानी चाहिए।






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