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शनिवार एवं देवशयनी एकादशी पर रायपुर स्टेशन के हनुमान मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, संस्थापक कुबेर राठी के नेतृत्व में 12 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद.....

  • साल 2009 से अनवरत जारी महाभंडारे में बंटा महाप्रसाद और छाते,व्यापारी, अयप्पा सेवा संगठन व भाजपाइयों ने कुबेर राठी की जनसेवा को सराहा

  • देवशयनी एकादशी व शनिवार के पावन योग पर तीन चरणों में संपन्न हुआ आयोजन,बारिश से बचाव के लिए 2000 राहगीरों को बांटे गए छाते

  • रायपुर हनुमान मंदिर महाभंडारा: कुबेर राठी की 17 वर्षों की अनवरत सेवा परंपरा, एकादशी व शनिवार पर जुटे 12 हजार से अधिक भक्त

  • राहगीरों को बांटे 2000 छाते, अयप्पा संगठन बोला-नाम की तरह ही सेवा में भी कुबेर हैं कुबेर राठी

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से -

रायपुर राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन परिसर स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर में शनिवार और देवशयनी एकादशी के महासंयोग पर सुबह से देर रात तक भक्ति का वातावरण बना रहा। पावन अवसर पर मंदिर सेवा समिति के संस्थापक कुबेर राठी द्वारा आयोजित विशाल महाभंडारे में शहर और आसपास के इलाकों से पहुंचे लगभग 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली का भोग प्रसाद ग्रहण किया।

वर्ष 2009 से अनवरत जारी इस सेवा परंपरा को इस बार भी गरिमामय रूप से निभाया गया। मंदिर समिति के संस्थापक कुबेर राठी के मार्गदर्शन में आयोजित यह महाभंडारा तीन प्रमुख चरणों में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के प्रबुद्ध जन, उद्योगपति और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

दोपहर 12 बजे महाभंडारे के प्रथम चरण की शुरुआत हुई। इस दौरान महाराष्ट्र के मुंबई से पधारे जाने-माने व्यवसायी एवं समाजसेवी सुशील पारिख और विवेक राठौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सर्वप्रथम संकट मोचन हनुमान जी महाराज की पूजा-अर्चना की और समस्त देशवासियों की सुख-समृद्धि और आरोग्य की मंगलकामना की। इसके पश्चात उन्होंने श्रद्धालुओं को अपने हाथों से महाप्रसाद वितरित किया।

मानसून के मौसम को देखते हुए इस अवसर पर सेवा समिति की ओर से सामाजिक सरोकार की एक विशेष पहल देखने को मिली। बारिश से बचाव के लिए स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों और राहगीरों को लगभग 1500 से 2000 छातों का नि:शुल्क वितरण किया गया।

इस दौरान मुंबई के व्यवसायी सुशील पारिख ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसेवा ही सबसे बड़ी ईश्वर भक्ति है। रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर प्रति शनिवार और विशेष अवसरों पर बिना रुके हजारों लोगों तक प्रसाद पहुंचाना एक अनुकरणीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज में परस्पर सहयोग और सद्भाव की भावना को मजबूत करते हैं।

वहीं विवेक राठौर ने कहा कि भगवान बजरंगबली संकटमोचन हैं और जो भी भक्त सच्चे निष्कपट मन से उनके दरबार में हाजिरी लगाता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। मंदिर परिसर में व्याप्त सकारात्मक ऊर्जा हर किसी को आत्मिक शांति प्रदान करती है।


महाभंडारे के दूसरे चरण में अयप्पा टेम्पल के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहभागिता रही। अयप्पा सेवा स्वामी संगठन के अध्यक्ष, महासचिव और सचिव ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटा।

श्री सर्वधर्म हनुमान मंदिर के समाजसेवी कुबेर राठी द्वारा वर्ष 2009 से अनवरत आयोजित किए जा रहे विशाल भंडारे की सराहना करते हुए श्रीनिवास राव ने इसे एक निरंतर चलने वाली महान सेवा बताया, उन्होंने कहा कि हर बार हजारों श्रद्धालु भगवान का प्रसाद ग्रहण करते हैं। जिस प्रकार सतयुग और त्रेता युग में अन्नक्षेत्र की स्थापना से सर्वलोक का कल्याण होता था, ठीक उसी भाँति आधुनिक काल में समाजसेवी कुबेर राठी का यह महाभंडारे का संकल्प मानो प्रभु हनुमान की कृपा से प्रज्वलित एक अक्षय अन्नपूर्णा ज्योति है, जो निरंतर हज़ारों क्षुधातुर आत्माओं को तृप्त कर रही है।

अयप्पा सेवा स्वामी के अध्यक्ष गोपाल मेनन ने कहा कि सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर परिसर में लगातार चला आ रहा यह महाभंडारा केवल भोजन वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा, आपसी भाईचारे और गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने मंदिर सेवा समिति द्वारा बीते कई वर्षों से अनवरत चलाए जा रहे इस पावन अनुष्ठान की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख स्थान पर प्रतिदिन हजारों यात्रियों व जरूरतमंदों की सेवा करना अनुकरणीय है। गोपाल मेनन ने विश्वास जताया कि ऐसे धार्मिक व सामाजिक सरोकार के कार्य समाज में समरसता की भावना को और मजबूत करेंगे तथा वे स्वयं भी इस पवित्र सेवा अभियान से निरंतर जुड़े रहेंगे।


कार्यक्रम के दौरान अयप्पा सेवा संगठन के महासचिव शरद नायर ने मंदिर समिति के संस्थापक कुबेर राठी के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि कुबेर राठी का व्यक्तित्व उनके नाम के अनुरूप ही है। जिस प्रकार धनपति कुबेर समृद्धि के प्रतीक हैं, उसी प्रकार कुबेर राठी निस्वार्थ जनसेवा और सहयोग के पर्याय बन चुके हैं। संकट के समय समाज के अंतिम व्यक्ति के साथ खड़े होना और जरूरतमंदों की मदद करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।


शरद नायर ने आगे बताया कि कुबेर राठी ने अयप्पा टेम्पल के आगामी सेवा प्रकल्पों के लिए भी सहयोग राशि का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि हनुमान मंदिर परिसर में आकर जो सुकून और आध्यात्मिक शांति मिली है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। यहां महाभंडारे में सेवा देने का जो अवसर मिला है, वह प्रेरणादायक है और यह भक्ति भाव अब हर शनिवार को उन्हें खिंचकर इस मंदिर तक लाएगा।


इसी क्रम में अयप्पा सेवा संगठन के प्रतिनिधि राकेश नायर ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राजधानी के मुख्य रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह मंदिर वर्षों से यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए आस्था और संबल का केंद्र बना हुआ है। धार्मिक और सामाजिक समरसता की ऐसी मिसाल बिरले ही देखने को मिलती है, जहां हर पृष्ठभूमि के लोग एक साथ मिलकर सेवा कार्य में हाथ बंटाते हैं।


तृतीय चरण की शुरुआत शाम की भव्य आरती के साथ हुई। इस चरण में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजकुमार राठी उपस्थित हुए। उन्होंने संध्या आरती में भाग लेकर भगवान बजरंगबली के श्रीचरणों में नमन किया और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति की प्रार्थना की।


भाजपा प्रवक्ता राजकुमार राठी ने मंदिर के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन परिसर स्थित यह दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर एक अत्यंत सिद्ध पीठ है। सनातन मान्यताओं और शास्त्रों में दक्षिण मुखी हनुमान जी की साधना-आराधना का विशेष फल बताया गया है।


पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि त्रेतायुग में जब माता सीता की खोज का समय आया, तब भगवान बजरंगबली ने दक्षिण दिशा की ओर ही प्रस्थान किया था। दक्षिण दिशा में ही उन्होंने लंका दहन कर प्रभु श्री राम के काज को सिद्ध किया और माता सीता का पता लगाया था। यही कारण है कि दक्षिण मुखी हनुमान स्वरूप को सभी प्रकार के संकटों का नाश करने वाला और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना गया है।


राजकुमार राठी ने आगे कहा कि साल 2009 से कुबेर राठी द्वारा शुरू किया गया यह महाभंडारा आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों से लेकर शहर के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं तक, हर कोई इस पावन दर से तृप्त होकर जाता है।


दिनभर चले इस भव्य आयोजन के दौरान पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के उद्घोष से गूंजता रहा। धार्मिक भजनों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बेहद अनुशासित तरीके से प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर समिति के कार्यकर्ताओं ने सुबह से लेकर देर रात तक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अपना सराहनीय योगदान दिया, जिससे आयोजन निर्विघ्न संपन्न हुआ।

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