मजदूर पलायन पर अहम भूमिका बसों की ।
बसना से बिलासपुर रायगढ़ जाने वाली बसें अपने निर्धारित समय पर न जाकर रातों-रात मजदूर भर कर भाग जाती है। सुबह बिलासपुर जाने वाले मुसाफिर भटकते नजर आते हैं।
इन दिनों सिंह ट्रेवल्स की बस जो तिवारी ढाबा में रात में रहती है।

जिस का बसना से बिलासपुर जाने का वक्त सुबह 5बज कर 45 मिनट पर है।
ये बस पिछले कई दिनों से मजदूर भरने रात में ही तिवारी ढाबा से चली जाती है और सुबह 3 /4 बजे मजदूरों को ठसा - ठस भर कर फर्राटे से बसना चौक से निकलती है। विगत रात्रि 12/11/021 को उड़ीसा के ठेकेदारों ने केरमुंडा में तीन बोलेरो वाहन में मजदूर लाकर मजदूरों को जमकर पिटाई की। कारण सिर्फ यह था कि वे लोग अपने रिश्तेदार की मृत्यु कार्यक्रम के बाद भट्ठा जाना चाहते थे, जिस पर ठेकेदारों ने जिन में 2 ठेकेदार बसना के भी बताए जा रहे हैं,ठेकेदारों ने मिलकर केरा मुण्डा तालाब के पास गाड़ी से मजदूरों को उतार कर पिटाई की। गये हुये मजदूरों के परिजनों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उड़ीसा के मजदूर दलाल जो छत्तीसगढ़ सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय हैं और बसना के दो मजदूर दलालों ने उनके परिजनों को बहुत मारा है अपना नाम ना उजागर करने की शर्त पर बताया कि अगर मेरा नाम छापेंगे तो जो मेरे परिजन मजदूरी करने गए है, भट्ठा दलालों के चंगुल में है वह दलाल वहां उत्तर प्रदेश में उन्हें प्रताड़ित करेंगे उन्हें जान से मार देंगे इस तरह का डर भय पैदा कर दिया है मजदूर दलालों ने।
ये मजदूर दलाल इसी सिंग ट्रेवल की बस से मजदूर भर कर भेजे हैं।
हम आपको बताते चलें कि प्रतिदिन रात्रि कालीन लंबी दूरी की बसे पलायन कर रहे मजदूरों से खचाखच भरी मिलेंगी खास कर झारखंड व उड़ीसा की तरफ जाने वाली बसों में यह नजारा रोज देखा जा सकता है।

अपुष्ट सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि सूत्रों की मानें तो बसना से बिलासपुर एवं रायगढ़ मार्ग पर चलने वाली बसों का यह आलम है कि प्रतिबंधित मादक पदार्थ गांजा की तस्करी करने वालों के लिए यह बेजोड़ माध्यम है गांजा तस्करी करने वालों के साथ जबरदस्त तालमेल इन बसों का है,ये अपनी बस लेकर रात में तस्करों को लेने उड़ीसा छत्तीसगढ़ सीमा तक चले जाते हैं। ये सभी बसें बिहारी ढाबा एवं तिवारी ढाबा में खड़ी होती है। वहीं से तस्कर इसमें बैठकर बड़ी आसानी से चला भी जा सकता है।

इन वाहनों पर कड़ी नजर रखनी होगी,इन वाहनों के मनमाने रवैए पर लगाम लगाना होगा।
इस बात पर कोई शक नहीं ये बसें अतिरिक्त पैसा कमाने की लालसा पर इस तरह की अपराधिक गतिविधियां करते होंगे।
प्रशासन को चाहिए कि बिलासपुर कोरबा रायगढ़ जाने वाली बसों को अपने निर्धारित समय पर चलने हेतु दिशा निर्देश एवं कडाई करें।

क्योंकि बिलासपुर रायगढ़ रेल मार्ग होने की वजह से आगे के सफर करने वालों के लिए बहुत महत्त्व रखता है, रेल सफर के लिए पूर्व से टिकट ली हुई होती है। और ऐन वक्त पर पता चलता है कि उक्त बस रात्रि में ही चली गई है। बिलासपुर न्यायधानी हाईकोर्ट होने के कारण भी लोगों को न्यायालयीन कार्यों हेतु बिलासपुर जाना आवश्यक होता है इन बसों के रात में भाग जाने से कोर्ट कचहरी के काम में लोगों को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
प्रश्न यह है कि क्या प्रवासी मजदूरों का पलायन रुकेगा? राज्य सरकार ने पलायन रोकने हेतु कई महत्वकांक्षी योजना बनाई है ताकि मजदूर पलायन ना करें, उन्हें उन्हीं के ग्राम पंचायतों में बराबर काम मिले। आज तक लाखों मजदूर पलायन कर चुके हैं और अभी अनवरत जारी है।

आश्चर्य का विषय है कि सरकार की अति महत्वकांक्षी योजनाओं को प्रशासन पूरा अमल क्यों नहीं कर रही है? अगर प्रशासन चाहे तो अभी भी पलायन रोका जा सकता है इन बसों से मजदूरों का ले जाना एवं मादक पदार्थ तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगाया जा सकता है।
प्रत्येक पंचायतों को पलायन ना हो उसकी जिम्मेदारी सौंपनी होगी। पलायन करने वालों को राशन कार्ड एवं अन्य सुविधाएं जॉब कार्ड,बीड़ी पत्ता संग्रहण कार्ड,बोनस जैसे अन्य जनहितैसी लाभ को निरस्त करना होगा, वरना वो दिन दूर नहीं जो पिछले 2 सालों में हमने महामारी के रूप में भोगा है। और यही पलायन कर गए मजदूरों को वापस लाने तथा पंचायत स्तर पर कोविड सेंटर बना कर। कोरोनटाइन कर पूरी देख रेख खर्च व परेशानियों का सामना ना करना पड़े। इस हालात को विगत 2 वर्षों में सब ने देखा है तो फिर पलायन क्यों?
0 ठेकेदारों द्वारा जबरिया पलायन क्यों?
0ठेकेदारों द्वारा मारपीट क्यों? यह सवाल हर एक के मन मस्तिष्क में कौंध रहा है।
देखना ये है कि ये समाधान किसके पास है?
००किस पर उम्मीद रखें०
''शून्य''






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