नई दिल्ली सात वर्षों बाद डेंगू के रिकार्ड मामले आए सामने एक मरीज की मौत.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
मच्छरजनित बीमारियों के आंकड़े छिपाने के पीछे जिस बात की आशंका जताई जा रही थी, लगभग वही सच साबित हो रही है। राजधानी में मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप इस समय चरम पर है। इतना ही नहीं, डेंगू के जो सर्वाधिक मामले वर्ष 2015 में आए थे, वैसी ही स्थिति की ओर दिल्ली इस वर्ष भी बढ़ रही है, क्योंकि यह उसके बाद दूसरा सर्वाधिक खतरनाक वर्ष है। डेंगू के आंकड़ों ने छह वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है। इतना ही नहीं, एक मरीज की मृत्यु भी हो गई है। इस वर्ष एक जनवरी से 23 सितंबर तक 3,013 मरीज मिल चुके हैं, जबकि वर्ष 2015 में इसी अवधि में डेंगू के 5,952 मामले मिले थे। वर्ष 2016 में 1692, 2017 में 1,807, 2018 में 481, 2019 में 282, 2020 में 212, 2021 में 341 और 2022 में 937 मरीज दर्ज हुए थे। इससे साबित होता है कि इन वर्षों में कभी डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 1,807 से ज्यादा नहीं हुआ, जबकि इस वर्ष 3,013 तक पहुंच चुका है। इससे दिल्ली में मच्छरजनित बीमारियों को लेकर हो रही भयावह स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
निगम के अनुसार एक मरीज की मृत्यु हुई है, वह कमला नगर का रहने वाला था। जुलाई में ही यह मृत्यु हो गई थी, जिसे निगम ने अगस्त में डेथ आडिट रिपोर्ट कमेटी में स्वीकृत किया था। दिल्ली में बाढ़ के बाद मच्छरजनित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने की पूरी आशंका थी, लेकिन निगम हाथ पर हाथ रखे बैठा रहा। कागजी कार्रवाई के अलावा निगम ने जमीनी स्तर पर कार्य किया होता तो शायद यह स्थिति नहीं होती। निचले इलाकों में भी अब भी लोग मच्छरों से परेशान हैं। वहीं, नालों की सफाई भी ठीक प्रकार से न होने से मच्छरजनित बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। एमसीडी के नेता सदन मुकेश गोयल ने कहा कि जी20 के नाम पर मच्छरजनित बीमारियों के आंकड़े न जारी करने का निर्देश निगम अधिकारियों को केंद्र सरकार से आया था। निगम के पास पर्याप्त दवाएं हैं, साथ ही सर्वाधिक फागिंग भी हो रही है।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments