करवा चौथ के दिन उजड़ा सुहाग: पारख नर्सिंग होम की कथित लापरवाही से 28 वर्षीय विवाहिता की मौत....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- करवा चौथ... एक ऐसा पवित्र दिन जब हर पत्नी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है और रात को चांद के साथ अपने पति का चेहरा देखकर खुशियां मनाती है। लेकिन राजनांदगांव में इस बार करवा चौथ पर एक ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर देखने वाले का कलेजा चीर कर रख दिया। जिस चेहरे को देखकर खुशियां मनानी थीं, आज उसी चेहरे को आखिरी बार देखकर एक बेबस पति दीपक जोशी ने अपनी 28 वर्षीय जवान पत्नी का नम आंखों से दाह संस्कार किया। एक मामूली सिरदर्द और खून की कमी का इलाज कराने पारख नर्सिंग होम पहुंची बैसाखीन जोशी की दर्दनाक मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पैसे के लालच में काल बना अस्पताल?
राजनांदगांव शहर के पारख नर्सिंग होम में 26 अक्टूबर को बैसाखीन को बड़ी उम्मीद के साथ भर्ती कराया गया था। परिजनों को क्या पता था कि यह अस्पताल उनके दांपत्य जीवन के लिए काल बन जाएगा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर करीब 22 हजार रुपये भी खर्च करवा लिए, लेकिन अंत में उनके हाथ सिर्फ निराशा और मौत लगी। हालत बिगड़ने पर महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या महिला की मौत रास्ते में हुई या अस्पताल में ही उसकी सांसें टूट चुकी थीं और प्रबंधन ने खुद को बचाने के लिए रेफर करने का नाटक रचा?
आयुष्मान कार्ड पर सौदेबाजी और गोलमोल जवाब
इस मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। परिजनों का सीधा आरोप है कि जब उन्होंने आयुष्मान कार्ड से इलाज करने को कहा, तो अस्पताल ने साफ इनकार कर दिया। वहीं, अब अपनी गर्दन फंसती देख डॉक्टर दावा कर रहे हैं कि परिजनों ने खुद नकद भुगतान की लिखित सहमति दी थी। यह जांच का सबसे बड़ा विषय है कि जब सरकार मुफ्त इलाज दे रही है, तो कोई गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार आखिर अपनी जेब से पैसे क्यों देना चाहेगा? क्या दबाव बनाकर या गुमराह करके यह सहमति लिखवाई गई?
इलाज में गंभीर लापरवाही और गायब रिपोर्ट
लापरवाही की हद तो तब हो गई जब मरीज ने डॉक्टर को खून की उल्टी होने की शिकायत की। इस गंभीर लक्षण के बावजूद क्या अस्पताल ने एंडोस्कोपी जैसी जरूरी जांच की? शरीर पर लाल गोल धब्बे पड़ने पर मरीज को अस्पताल की एंबुलेंस से त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास भेजा गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि परिजनों को जो फाइल दी गई है, उसमें त्वचा विशेषज्ञ की रिपोर्ट ही गायब है। वहीं ईसीजी रिपोर्ट सामान्य बताई गई। डॉक्टर का रटा-रटाया जवाब है कि मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे रायपुर या मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव ले जाने की सलाह दी गई थी।
शासन-प्रशासन से निष्पक्ष जांच की गुहार
एक हंसता-खेलता परिवार आज मातम में डूब गया है। पारख नर्सिंग होम की भूमिका, इलाज की फाइल, गायब जांच रिपोर्ट, आयुष्मान कार्ड से इनकार और रेफरल दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच अब बेहद जरूरी है। शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेते हुए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर जांच करनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि मौत का असली कारण क्या था। दोषियों पर ऐसी सख्त कार्रवाई हो कि भविष्य में किसी और का सुहाग निजी अस्पतालों की लापरवाही और लालच की भेंट न चढ़े।






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