रायपुर रोड स्थित लाइफलाइन हॉस्पिटल की मनमानी; आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों से अवैध वसूली और बदसलूकी का आरोप....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
मुंगेली: स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और गरीबों को मुफ्त इलाज मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही 'आयुष्मान योजना' की धज्जियां मुंगेली के निजी अस्पताल किस तरह उड़ा रहे हैं, इसका एक गंभीर मामला सामने आया है। रायपुर रोड स्थित लाइफलाइन हॉस्पिटल एक बार फिर अपनी तानाशाही और अवैध वसूली को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गया है।आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों से जबरन अवैध वसूली, इलाज रोकने की धमकी और अस्पताल प्रबंधन की गुंडागर्दी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 23 अक्टूबर 2026 को पथरिया तहसील के ग्राम गंगद्वारी निवासी मरीज नीतीश आनंद को इलाज के लिए लाइफलाइन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मरीज के पास वैध आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद, अस्पताल प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर महज 6 दिनों के इलाज के एवज में लगभग ₹40,000 नकद और ऑनलाइन माध्यम से जबरन वसूल लिए। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होते ही फिल्मी स्टाइल में मरीजों से वसूली का खेल शुरू हो जाता है। यदि पैसे देने में असमर्थता जताई जाए, तो सरेआम इलाज बंद करने की धमकी दी जाती है। परिजनों की गिड़गिड़ाहट और यह कहने पर कि "अभी हमारे पास पैसे नहीं हैं, कृपया इलाज जारी रखिए"—अस्पताल प्रबंधन आगे का इलाज रोक देता था। मजबूर और लाचार परिजनों को अपनी व्यवस्थाओं को दांव पर लगाकर किसी तरह पैसे का जुगाड़ करना पड़ा और अस्पताल की झोली भरनी पड़ी।
विवादों से पुराना नाता, रसूख के दम पर कार्रवाई से परहेज
मुंगेली के रायपुर रोड पर संचालित यह लाइफलाइन हॉस्पिटल हमेशा से ही विवादों के घेरे में रहा है। अस्पताल पर इससे पहले भी अनेकों बार गंभीर शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन संस्था प्रमुख और संस्था से जुड़े रसूखदार लोगों की मजबूत पहुंच व पकड़ के कारण आज तक इस अस्पताल पर कोई ठोस या बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है। यही वजह है कि इस संस्थान के भीतर सरेआम धांधली और स्टाफ से लेकर डॉक्टरों तक की बदसलूकी खुलेआम देखी जाती है। सीधे शब्दों में कहें तो अस्पताल प्रबंधन की यह कार्यशैली किसी 'गुंडागर्दी' से कम नहीं है। मरीजों और उनके तीमारदारों से बात-बात पर यह कहकर अपमानित किया जाता है—"इलाज कराना है तो कराओ, वरना यहां से सीधे बाहर जाओ!"—जिससे साफ जाहिर होता है कि इस अस्पताल के लिए मरीज इंसान नहीं, बल्कि केवल 'कमाई का एक जरिया' मात्र हैं।
मिलने पर पाबंदी और तानाशाही नियम
लाइफलाइन हॉस्पिटल की तानाशाही का आलम यह है कि यदि कोई पीड़ित या उसका परिजन अस्पताल के मुख्य डॉक्टर या उच्च प्रबंधन से मिलकर अपनी समस्या रखना चाहे, तो इसके लिए अस्पताल में पूरी तरह से प्रतिबंधात्मक नियम बनाए गए हैं। न तो डॉक्टर का संपर्क नंबर दिया जाता है और न ही किसी भी परिस्थिति में प्रबंधन से मुलाकात करवाई जाती है, ताकि मरीजों का शोषण और अंदर चल रहा काला कारोबार दुनिया की नजरों से छिपा रहे।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल
मरीज के परिजनों द्वारा इस पूरे प्रकरण की शिकायत फिलहाल सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज करा दी गई है। साथ ही, बहुत जल्द इस मामले की विस्तृत और लिखित शिकायत ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी (BMO), मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला कलेक्टर (DM) और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को सौंपे जाने की बात कही जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या हर बार की तरह इस बार भी रसूख के आगे शिकायतों को दबा दिया जाएगा, या वाकई प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा? जरूरत इस बात की है कि ऐसे बेलगाम अस्पतालों पर सख्त से सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाए, इनकी नियमावली और लाइसेंस की गहन जांच की जाए, ताकि आम मरीजों के साथ हो रही बदसलूकी और अवैध-अत्यधिक धन की अंधाधुंध वसूली पर स्थायी रोक लग सके।
शालिनी न्यूज़ एजेंसी संवाददाता राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ #MungeliNews #ChhattisgarhNews #AyushmanBharat #LifelineHospital #HealthcareFraud #MedicalNegligence #ShaliniNewsAgency #BreakingADNNews






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