कुशालपुर रामलीला मैदान बना नशेड़ियों का अड्डा, रहवासी खौफ में; पुलिस प्रशासन तुरंत करे सख्त कार्रवाई - मनोज सिंह ठाकुर......
- ANIS LALA DANI

- 12 hours ago
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पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से -
रायपुर- पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुशालपुर के ऐतिहासिक रामलीला (दशहरा) मैदान में इन दिनों असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का जमावड़ा इस कदर बढ़ गया है कि आसपास के नागरिकों का जीना दूभर हो चुका है। इस गंभीर समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व सदस्य (छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल) एवं अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने पुलिस प्रशासन से तत्काल इस पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि कुशालपुर का रामलीला मैदान, जो सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होना चाहिए, वह वर्तमान में नशेड़ियों के संरक्षण स्थल में तब्दील हो चुका है। दिन ढलते ही यहाँ असामाजिक तत्वों का डेरा जम जाता है। देर रात तक शराब पीना, नशीले पदार्थों का सेवन करना, आपस में खूनी संघर्ष करना और अत्यंत गंदी व अश्लील गाली-गलौज करना यहाँ की रोज की कहानी बन चुकी है।
रहवासियों में डर का माहौल, बहन-बेटियों का निकलना मुश्किल
मैदान के चारों ओर घनी बस्ती और रहवासी इलाका है। इस दूषित माहौल के कारण स्थानीय नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में भारी दहशत का माहौल है। शाम के बाद महिलाओं और बहन-बेटियों का घर से बाहर निकलना असुरक्षित हो गया है। विरोध करने पर ये नशेड़ी विवाद और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं, जिससे क्षेत्र में कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घटित हो सकती है।
पुलिस प्रशासन से तत्काल एक्शन की मांग
मनोज सिंह ठाकुर ने रायपुर पुलिस और पुरानी बस्ती थाना प्रभारी से पुरजोर मांग की है कि -
रामलीला मैदान में तत्काल पुलिस की गश्त (पेट्रोलिंग) बढ़ाई जाए। शाम होते ही मैदान के भीतर और आसपास जुटने वाले संदिग्धों की कड़ाई से धरपकड़ की जाए।
यहाँ स्थाई रूप से पुलिस पॉइंट या शाम के वक्त पुलिस बल की तैनाती की जाए, ताकि इस जमवाड़े को जड़ से खत्म किया जा सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनहित और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एक्शन नहीं लिया और मैदान को नशेड़ियों के चंगुल से मुक्त नहीं कराया, तो स्थानीय नागरिकों को साथ लेकर उग्र आंदोलन और थाने का घेराव करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।




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